✦ लक्ष्मी गणेश यन्त्र ✦
✦ धन एवं विघ्न-नाश का संयुक्त यन्त्र ✦
✦ लक्ष्मी गणेश यन्त्र क्या है? ✦
लक्ष्मी गणेश यन्त्र — दो परम-शुभ देवियों की संयुक्त शक्ति का यन्त्र। श्री महालक्ष्मी (धन-दात्री) एवं श्री गणेश (विघ्न-नाशक) की उपासना एक साथ इस यन्त्र पर की जाती है।
व्यापारी एवं गृहस्थ-जन इसे विशेष रूप से दीवाली पर स्थापित करते हैं। माना गया है — यन्त्र-स्थापना से व्यापार में शुभ-वृद्धि, धन-आगमन, ऋण-निवारण, एवं समस्त विघ्नों का नाश होता है।
दीवाली पूजा में लक्ष्मी-गणेश यन्त्र का विशेष महत्व है। नये कार्यालय, दुकान, घर के मन्दिर अथवा तिजोरी में इसे स्थापित किया जाता है।
✦ ज्यामितीय रचना ✦
केन्द्र में दो बिन्दु (लक्ष्मी एवं गणेश) — चार ऊर्ध्व-मुखी एवं चार अधो-मुखी त्रिकोणों के संयोग से अष्टकोण बनता है। अष्टकोण के बाहर अष्ट-दल कमल, फिर एक वृत्त एवं भूपुर (वर्ग-चार द्वार)। मध्य में "श्रीं" (लक्ष्मी बीज) एवं "गं" (गणेश बीज) अंकित।
✦ अधिष्ठात्री देवता ✦
श्री महालक्ष्मी (विष्णु पत्नी, धन-समृद्धि-सौन्दर्य की देवी) एवं श्री गणेश (शिव-पार्वती के पुत्र, विघ्न-नाशक, बुद्धि के देवता)।
✦ मन्त्र ✦
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
Om Shreem Hreem Shreem Kamale Kamalalaye Praseed Praseed Om Shreem Hreem Shreem Mahalakshmyai Namah
अर्थ: कमलासना महालक्ष्मी देवी प्रसन्न हों — धन एवं ऐश्वर्य प्रदान करें।
अनुशंसित जप: 108 बार
ॐ गं गणपतये नमः
Om Gam Ganapataye Namah
अर्थ: गणपति देव को प्रणाम — विघ्न-नाश एवं कार्य-सिद्धि।
अनुशंसित जप: 108 बार
✦ लाभ एवं फल ✦
✦ स्थापना नियम ✦
सामग्री
स्वर्ण-रजत संयोग, अष्टधातु, अथवा ताम्र पत्र पर अंकित। दीवाली पर मन्त्र-सिद्ध यन्त्र की स्थापना श्रेष्ठ।
दिशा
पूजा-गृह अथवा तिजोरी में उत्तर-पूर्व कोण। यन्त्र का मुख उत्तर अथवा पूर्व की ओर रखें।
मुहूर्त
दीवाली, धनतेरस, अक्षय तृतीया, गुरु पुष्य योग। शुक्रवार सायं प्रदोष काल विशेष शुभ।