लक्ष्मी गणेश यन्त्र

लक्ष्मी गणेश यन्त्र

धन एवं विघ्न-नाश का संयुक्त यन्त्र

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लक्ष्मी गणेश यन्त्र क्या है?

लक्ष्मी गणेश यन्त्र — दो परम-शुभ देवियों की संयुक्त शक्ति का यन्त्र। श्री महालक्ष्मी (धन-दात्री) एवं श्री गणेश (विघ्न-नाशक) की उपासना एक साथ इस यन्त्र पर की जाती है।

व्यापारी एवं गृहस्थ-जन इसे विशेष रूप से दीवाली पर स्थापित करते हैं। माना गया है — यन्त्र-स्थापना से व्यापार में शुभ-वृद्धि, धन-आगमन, ऋण-निवारण, एवं समस्त विघ्नों का नाश होता है।

दीवाली पूजा में लक्ष्मी-गणेश यन्त्र का विशेष महत्व है। नये कार्यालय, दुकान, घर के मन्दिर अथवा तिजोरी में इसे स्थापित किया जाता है।

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ज्यामितीय रचना

केन्द्र में दो बिन्दु (लक्ष्मी एवं गणेश) — चार ऊर्ध्व-मुखी एवं चार अधो-मुखी त्रिकोणों के संयोग से अष्टकोण बनता है। अष्टकोण के बाहर अष्ट-दल कमल, फिर एक वृत्त एवं भूपुर (वर्ग-चार द्वार)। मध्य में "श्रीं" (लक्ष्मी बीज) एवं "गं" (गणेश बीज) अंकित।

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अधिष्ठात्री देवता

श्री महालक्ष्मी (विष्णु पत्नी, धन-समृद्धि-सौन्दर्य की देवी) एवं श्री गणेश (शिव-पार्वती के पुत्र, विघ्न-नाशक, बुद्धि के देवता)।

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मन्त्र

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

Om Shreem Hreem Shreem Kamale Kamalalaye Praseed Praseed Om Shreem Hreem Shreem Mahalakshmyai Namah

अर्थ: कमलासना महालक्ष्मी देवी प्रसन्न हों — धन एवं ऐश्वर्य प्रदान करें।

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ॐ गं गणपतये नमः

Om Gam Ganapataye Namah

अर्थ: गणपति देव को प्रणाम — विघ्न-नाश एवं कार्य-सिद्धि।

अनुशंसित जप: 108 बार

लाभ एवं फल

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व्यापार में स्थिर वृद्धि
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ऋण-नाश
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विघ्न-नाश
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गृह-शुद्धि एवं सकारात्मक ऊर्जा
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विद्या एवं बुद्धि-वृद्धि
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दाम्पत्य सुख
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स्थापना नियम

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सामग्री

स्वर्ण-रजत संयोग, अष्टधातु, अथवा ताम्र पत्र पर अंकित। दीवाली पर मन्त्र-सिद्ध यन्त्र की स्थापना श्रेष्ठ।

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दिशा

पूजा-गृह अथवा तिजोरी में उत्तर-पूर्व कोण। यन्त्र का मुख उत्तर अथवा पूर्व की ओर रखें।

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मुहूर्त

दीवाली, धनतेरस, अक्षय तृतीया, गुरु पुष्य योग। शुक्रवार सायं प्रदोष काल विशेष शुभ।