शुक्रवार-व्रत — माँ-लक्ष्मी, सन्तोषी-माँ, माँ-दुर्गा को समर्पित। शुक्र-ग्रह-शान्ति। 2026 में प्रत्येक-शुक्रवार। फल: धन-वृद्धि, सौन्दर्य, दाम्पत्य-सुख, सौभाग्य।
16 शुक्रवार सन्तोषी-माँ-व्रत — विशेष पारिवारिक-शान्ति-कलह-निवारण।
✦ शुक्रवार-व्रत-विधि
प्रात: स्नान। सफेद/गुलाबी वस्त्र।
लक्ष्मी/सन्तोषी-माँ-स्थापना। श्री-यन्त्र।
दिन-भर फलाहार। चना-गुड़ का प्रसाद (सन्तोषी-व्रत में अनिवार्य)।
पूजा: पञ्चामृत-स्नान। चन्दन-तिलक। गुलाब/सफेद-फूल।
मन्त्र: "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" 108 बार।
सन्तोषी-व्रत: कथा-श्रवण। चना-गुड़-प्रसाद-वितरण।
विशेष: शुक्रवार खट्टा (नींबू, इमली, अमचूर) न खाएँ।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
16 शुक्रवार के बाद उद्यापन?▼
हाँ। 17वें शुक्रवार पर 8 ब्राह्मण-कन्या-भोज। सन्तोषी-माँ की कथा। प्रसाद-वितरण।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।