महालक्ष्मी यन्त्र

महालक्ष्मी यन्त्र

अष्ट-लक्ष्मी का सम्पूर्ण कृपा-यन्त्र

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महालक्ष्मी यन्त्र क्या है?

महालक्ष्मी यन्त्र — श्री महालक्ष्मी देवी की उपासना का प्रमुख यन्त्र। महालक्ष्मी विष्णु की पत्नी, धन-धान्य-समृद्धि-सौन्दर्य की देवी एवं ब्रह्माण्ड की पालन-शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं।

महालक्ष्मी आठ रूपों में प्रकट होती हैं — आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, सन्तान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी। महालक्ष्मी यन्त्र इन सभी रूपों की संयुक्त शक्ति का भण्डार है।

शुक्रवार महालक्ष्मी का दिन है। दीवाली के दिन इस यन्त्र की पूजा करना सर्वोत्तम। यन्त्र की स्थापना से अक्षय धन-धान्य, सौभाग्य, ऐश्वर्य, सन्तान-सुख, एवं समस्त दैहिक-दैविक सुखों की प्राप्ति होती है।

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ज्यामितीय रचना

केन्द्र में बिन्दु एवं "श्रीं" बीज — अष्ट-दल कमल जिसमें अष्ट लक्ष्मी अंकित — फिर त्रिकोण-समूह — सोलह-दल कमल — वृत्त — भूपुर। प्रत्येक दल पर एक लक्ष्मी रूप का बीज मन्त्र। अष्ट दिशाओं में आठ रिद्धि-सिद्धियाँ।

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अधिष्ठात्री देवता

श्री महालक्ष्मी — विष्णु पत्नी, ब्रह्माण्ड की पोषक-शक्ति, अष्ट-रूपा। समुद्र-मन्थन से प्रकट हुई आदि-शक्ति।

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मन्त्र

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

Om Shreem Mahalakshmyai Namah

अर्थ: महालक्ष्मी देवी को नमन — सम्पूर्ण समृद्धि की देवी।

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ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै कमलवासिन्यै स्वाहा

Om Hreem Shreem Kleem Mahalakshmyai Kamalavasinyai Svaha

अर्थ: कमल पर विराजमान महालक्ष्मी — मेरे जीवन में अक्षय श्री प्रदान करें।

अनुशंसित जप: 108 बार

लाभ एवं फल

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अक्षय धन-धान्य
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सन्तान-सुख
🏆
विद्या एवं विजय
💑
दाम्पत्य सुख एवं सौन्दर्य
📈
व्यापार में स्थिरता
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ऋण-नाश एवं वित्तीय स्वतन्त्रता
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स्थापना नियम

💎

सामग्री

स्वर्ण-पट्ट (श्रेष्ठतम), रजत, अष्टधातु, कमल-पुष्प पत्र, अथवा भूर्ज पत्र पर रोली-केसर से अंकित।

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दिशा

पूजा-गृह की उत्तर अथवा पूर्व दीवार। यन्त्र का मुख पूर्व-उत्तर। साधक उत्तराभिमुख होकर पूजन करे।

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मुहूर्त

दीवाली रात्रि (अमावस्या), शुक्रवार सायं प्रदोष काल, वैशाख शुक्ल पूर्णिमा, अक्षय तृतीया, धनतेरस।