महालक्ष्मी-व्रत — 16 दिनों का कठोर-व्रत। भाद्रपद-शुक्ल-अष्टमी से अश्विन-कृष्ण-अष्टमी। 2026 में 19 सितम्बर - 4 अक्टूबर। पुत्र-धन-सम्पत्ति-समृद्धि-सौभाग्य के लिए।
✦ महालक्ष्मी-व्रत 2026
प्रारम्भ: 19 सितम्बर 2026 (शनि) — भाद्रपद-शुक्ल-अष्टमी।
समाप्ति: 4 अक्टूबर 2026 (रवि) — आश्विन-कृष्ण-अष्टमी।
कुल 16 दिन। प्रत्येक-दिन व्रत + पूजा।
व्रत-संकल्प पहले-दिन। कलश-स्थापना।
दैनिक-पूजा सायं। श्रीसूक्त-पाठ। 16 गाँठें वाला रक्षा-सूत्र हाथ पर।
उद्यापन: 16वें दिन पूर्ण-विधि। 16 ब्राह्मण-भोज।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
16 दिन निर्जला सम्भव नहीं?▼
फलाहारी-व्रत भी मान्य। एक-समय भोजन। मांस-मदिरा-वर्जित।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।