कुबेर पूजा

धनतेरस (6 नवम्बर) + दीपावली (8 नवम्बर) मुख्य

दिशा

उत्तर

मन्त्र

ॐ श्रीं वित्तेश्वराय नमः

सर्वोच्च-दिन

धनतेरस

कुबेर-पूजा — धन-कोष के देवता कुबेर की पूजा। उत्तर-दिशा के दिक्पाल। यक्षों के राजा। शिव-मित्र। धनतेरस + दीपावली पर मुख्य-पूजन।

2026 में मुख्य-कुबेर-पूजा-दिन: धनतेरस (6 नवम्बर शुक्र) + दीपावली (8 नवम्बर रवि) + अक्षय-तृतीया (3 मई)।

कुबेर-पूजा का महत्त्व

कुबेर 9-निधि-स्वामी: पद्म, महापद्म, शंख, मकर, कच्छप, मुकुन्द, कुन्द, नील, खर्व। ये 9 खजाने।

दिशा: उत्तर। तिजोरी, कमरा, कार्यालय उत्तर-मुख श्रेष्ठ।

पुष्प: सफेद। वाहन: नर-वाहन (मानव-वाहित पालकी)।

मन्त्र: "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः"।

यन्त्र: कुबेर-यन्त्र (अष्टकोणीय)। तिजोरी में स्थापित।

कुबेर-पूजा की विधि

पूजा-स्थल: उत्तर-दिशा। कुबेर-यन्त्र/मूर्ति।

सामग्री: सफेद-वस्त्र, सफेद-फूल, चन्दन, अक्षत, धूप, दीप, चांदी-सिक्का, पञ्चामृत।

विधि: 1) गणेश-स्मरण 2) कुबेर-स्थापना 3) षोडशोपचार-पूजन 4) कुबेर-स्तोत्र-पाठ 5) मन्त्र-जप 108 बार 6) तिजोरी-पूजन 7) चांदी-सिक्का-दान।

विशेष: तिजोरी पर हल्दी-कुंकुम। पहली-बार रखा-धन रात-भर रहे।

धनतेरस: नया-तिजोरी-धातु-वाहन-खरीदारी का सर्वोच्च-दिन।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुबेर एवं लक्ष्मी अलग क्यों?

लक्ष्मी = सक्रिय-धन-प्रवाह (आय)। कुबेर = स्थिर-धन-कोष (बचत-तिजोरी)। दोनों मिलकर पूर्ण-धन-व्यवस्था। दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश + कुबेर तीनों की पूजा।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।