वास्तु शास्त्र

5,000+ वर्ष पुराना भारतीय वास्तु-शास्त्र

ईशान (पूर्व-उत्तर)

पूजा-स्थल

आग्नेय (पूर्व-दक्षिण)

रसोई

नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम)

मास्टर-बेडरूम

वास्तु-शास्त्र — प्राचीन भारतीय-वास्तुकला-शास्त्र। घर-दुकान-कार्यालय-मन्दिर के निर्माण में 5-तत्त्वों (पृथ्वी-जल-अग्नि-वायु-आकाश) + 8-दिशाओं + वास्तु-पुरुष का संरेखण। 5,000+ वर्ष पुराना। मय-मतम्, मानसार, समरांगण-सूत्रधार मूल-ग्रन्थ।

आधुनिक-संदर्भ: सब बड़े-मन्दिर (तिरुपति, मीनाक्षी, श्री-राम-मन्दिर अयोध्या) वास्तु-नियमों से बने। आधुनिक-घरों में भी पारिवारिक-शान्ति, स्वास्थ्य, समृद्धि के लिए वास्तु-नियम।

घर के 8 कोणों का वास्तु

ईशान (उत्तर-पूर्व): पूजा-स्थल, ध्यान-कक्ष। जल-स्रोत (कुआँ, टंकी)। सबसे-शुभ-कोण।

पूर्व: मुख्य-द्वार (श्रेष्ठ)। अध्ययन-कक्ष। सूर्य-प्रकाश।

आग्नेय (पूर्व-दक्षिण): रसोई। चूल्हा। बिजली-यन्त्र।

दक्षिण: मास्टर-बेडरूम। भारी-सामान। पीठ-पीछे (सोते-समय)।

नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम): मास्टर-बेडरूम। तिजोरी। भारी-निर्माण।

पश्चिम: बच्चों का कमरा। अध्ययन। शौचालय।

वायव्य (पश्चिम-उत्तर): अतिथि-कक्ष। गाड़ी-स्थल।

उत्तर: व्यवसाय-कार्यालय। तिजोरी। हल्का-निर्माण।

ब्रह्मस्थान (केन्द्र): खाली रखें। ऊँचा-निर्माण न।

मुख्य-द्वार के वास्तु-नियम

श्रेष्ठ-दिशा: पूर्व, उत्तर, उत्तर-पूर्व।

टालें: दक्षिण-मुखी (यम-दिशा), नैऋत्य।

मुख्य-द्वार के सामने: पीपल-वृक्ष, खम्बा, बिजली-पोल वर्जित।

मुख्य-द्वार पर: तोरण, ओम/स्वस्तिक, गणेश-मूर्ति।

दहलीज: हो (नीची भी हो) — ऊर्जा-संरेखण।

दरवाजा: अन्दर की ओर खुले (बाहर खुलना अशुभ)।

वास्तु-दोष-निवारण

पूर्ण-निर्माण के बाद वास्तु-दोष: 1) रुद्राभिषेक। 2) वास्तु-शान्ति-होम। 3) नवग्रह-शान्ति।

दक्षिण-मुखी द्वार: हनुमान-मूर्ति मुख्य-द्वार पर। बजरंग-बाण-पाठ।

ईशान-शौचालय (दोष): हो-तो "हरि-ॐ" लिखें। तुलसी-पौधा।

आग्नेय-शयनकक्ष: रंग बदलें (पीला)। शिव-चित्र।

सीढ़ी-नीचे शौचालय: हटाएँ या मन्दिर-शिफ्ट।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किरायेदार के लिए वास्तु अनिवार्य?

पूर्ण-निर्माण नहीं — पर मुख्य-स्थानों (बेडरूम, पूजा-स्थल, रसोई) का संरेखण कर सकते। यदि गम्भीर-दोष — मकान बदलें।

फेंगशुई vs वास्तु?

दोनों समान-सिद्धान्त। वास्तु = भारतीय (5000 वर्ष)। फेंगशुई = चीनी (3000 वर्ष)। दिशा-नियम भिन्न पर मूल-तत्त्व-संरेखण समान।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।