भगवान् कुबेर

भगवान् कुबेर

धन का अधिष्ठाता, यक्षेन्द्र, उत्तर-दिक्पाल

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भगवान् कुबेर परिचय

अन्य नाम / उपाधियाँ: धनेश्वर, वित्तेश, यक्षराज, वैश्रवण, धनद, राजराज, अल्पकाय

भगवान् कुबेर हिन्दू पौराणिक परम्परा में देवों के कोषाध्यक्ष एवं समस्त ऐश्वर्य के अधिष्ठाता हैं। वे यक्षों के राजा, उत्तर दिशा के अधिपति, एवं अष्ट-दिक्पालों में से एक हैं। पुराण कथा अनुसार कुबेर पुलस्त्य ऋषि के पुत्र विश्रवा से उत्पन्न हुए — रावण उनके सौतेले भाई हैं।

कुबेर ने कठोर तपस्या से शिव की कृपा प्राप्त की। इसी कारण वे सर्वाधिक धनी देव बने। उनकी राजधानी "अलकापुरी" मेरु पर्वत के उत्तर में स्थित है — रत्नों एवं स्वर्ण से निर्मित। यहीं से वे ब्रह्माण्ड के समस्त धन-कोष का प्रबन्ध करते हैं।

कुबेर लक्ष्मी के समान धन-दाता हैं, परन्तु अंतर है — लक्ष्मी "गति-शील" धन की देवी हैं (आती-जाती), जबकि कुबेर "स्थिर" धन के स्वामी हैं (तिजोरी, कोष)। इसीलिए दीवाली पर लक्ष्मी पूजन के साथ कुबेर पूजन का विधान है।

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स्वरूप एवं चित्रण

अल्प-काय, स्थूल-शरीर, श्वेत-वर्ण। तीन पैर एवं ८ दाँत (कुछ चित्रों में)। हाथ में गदा एवं धन-कोष (नकुल-धन-थैली)। मणि-कुण्डल, मुकुट, स्वर्ण-आभूषण। वाहन — नर-वाहन (मनुष्य) अथवा भैंसा। कुछ रूपों में सिंह वाहन।

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परिवार एवं सम्बन्ध

पिताविश्रवा (पुलस्त्य ऋषि के पुत्र)
माताइडविडा
भाईरावण (सौतेले)
पत्नीभद्रा अथवा यक्षी
पुत्रनलकूबर एवं मणिग्रीव
धामअलकापुरी (मेरु के उत्तर)
दिशाउत्तर
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प्रमुख मन्त्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः

Om Shreem Hreem Kleem Shreem Kleem Vitteshvaraya Namah

अर्थ: धनेश्वर कुबेर देव को नमस्कार — अक्षय धन-वैभव प्रदान करें।

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन धान्याधिपतये धन धान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा

Om Yakshaya Kuberaya Vaishravanaya · Dhana-Dhanya-adhipataye · Dhana-Dhanya-Samriddhim Me Dehi Dapaya Svaha

अर्थ: धन-धान्य के स्वामी, यक्षेन्द्र कुबेर — मुझे धन एवं अन्न की समृद्धि प्रदान करें।

दार्शनिक प्रतीक

कुबेर "स्थिर ऐश्वर्य" का प्रतीक — मेहनत से अर्जित, संरक्षित, एवं संग्रहित धन। उनका अल्प-काय रूप दर्शाता है कि धन का संचय भौतिक आकार से नहीं, मन की दृढ़ता से होता है। तीन पैर — भूत, वर्तमान, भविष्य के तीनों कालों में स्थिर सम्पत्ति। उत्तर दिशा — स्थिरता, ध्रुव, अचल सम्पत्ति का प्रतीक।