✦ कुबेर यन्त्र ✦
✦ धन-कोषाध्यक्ष कुबेर का धन-वर्धक यन्त्र ✦
✦ कुबेर यन्त्र क्या है? ✦
कुबेर यन्त्र — देवों के कोषाध्यक्ष भगवान् कुबेर की शक्ति का यन्त्र। पुराण-कथा के अनुसार कुबेर शिव के परम भक्त एवं उत्तर दिशा के अधिपति हैं। उनकी कृपा से अक्षय धन-कोष की प्राप्ति होती है।
व्यापारी, उद्यमी, एवं धन की चाह रखने वाले इस यन्त्र की स्थापना कार्यालय की तिजोरी, धन-कोष, अथवा गृह के उत्तर दीवार पर करते हैं। कुबेर यन्त्र को "अंक यन्त्र" भी कहते हैं — क्योंकि इसमें १-९ संख्याओं का जादुई वर्ग बना होता है।
दीवाली, धनतेरस, अक्षय तृतीया पर कुबेर यन्त्र की स्थापना सर्वोत्तम मानी गई है। माना जाता है — कुबेर मन्त्र के साथ इस यन्त्र की उपासना से दीर्घकालीन धन-स्थायित्व मिलता है, क्षणिक नहीं।
✦ ज्यामितीय रचना ✦
३×३ का जादुई वर्ग — २२, २३, २४ / २५, २६, २७ / २८, २९, ३० (कुल योग ७२) अथवा १-९ संख्याओं का संयोजन जिनकी प्रत्येक रेखा का योग १५ हो। चारों ओर अष्ट-दल कमल एवं भूपुर। मध्य में "कुं" बीज एवं "कुबेराय नमः" मन्त्र अंकित।
✦ अधिष्ठात्री देवता ✦
भगवान् कुबेर — शिव-गण के नायक, यक्षों के राजा, उत्तर दिशा के अधिपति, अष्ट-दिक्पाल में से एक। नवग्रहों में नहीं, परन्तु धन के सर्वोच्च देवता।
✦ मन्त्र ✦
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः
Om Shreem Hreem Kleem Shreem Kleem Vitteshvaraya Namah
अर्थ: धनेश्वर कुबेर देव को नमन — अक्षय धन-वैभव प्रदान करें।
अनुशंसित जप: 108 बार
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन धान्याधिपतये धन धान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा
Om Yakshaya Kuberaya Vaishravanaya · Dhana-Dhanya-adhipataye · Dhana-Dhanya-Samriddhim Me Dehi Dapaya Svaha
अर्थ: धन-धान्य के स्वामी, यक्षेन्द्र कुबेर — मुझे धन एवं अन्न की समृद्धि प्रदान करें।
✦ लाभ एवं फल ✦
✦ स्थापना नियम ✦
सामग्री
स्वर्ण (श्रेष्ठतम), रजत, अष्टधातु, अथवा ताम्र पत्र पर अंकित। आधुनिक काल में सिद्ध-यन्त्र भी बाजार में उपलब्ध।
दिशा
गृह अथवा कार्यालय की उत्तर दीवार पर। तिजोरी का मुख दक्षिण की ओर हो (तिजोरी उत्तर दीवार के सहारे)। साधक उत्तराभिमुख होकर पूजन करें।
मुहूर्त
धनतेरस, दीवाली, अक्षय तृतीया, गुरु पुष्य योग, धन त्रयोदशी। शुक्रवार रात्रि अथवा शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी।