कुबेर यन्त्र

कुबेर यन्त्र

धन-कोषाध्यक्ष कुबेर का धन-वर्धक यन्त्र

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कुबेर यन्त्र क्या है?

कुबेर यन्त्र — देवों के कोषाध्यक्ष भगवान् कुबेर की शक्ति का यन्त्र। पुराण-कथा के अनुसार कुबेर शिव के परम भक्त एवं उत्तर दिशा के अधिपति हैं। उनकी कृपा से अक्षय धन-कोष की प्राप्ति होती है।

व्यापारी, उद्यमी, एवं धन की चाह रखने वाले इस यन्त्र की स्थापना कार्यालय की तिजोरी, धन-कोष, अथवा गृह के उत्तर दीवार पर करते हैं। कुबेर यन्त्र को "अंक यन्त्र" भी कहते हैं — क्योंकि इसमें १-९ संख्याओं का जादुई वर्ग बना होता है।

दीवाली, धनतेरस, अक्षय तृतीया पर कुबेर यन्त्र की स्थापना सर्वोत्तम मानी गई है। माना जाता है — कुबेर मन्त्र के साथ इस यन्त्र की उपासना से दीर्घकालीन धन-स्थायित्व मिलता है, क्षणिक नहीं।

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ज्यामितीय रचना

३×३ का जादुई वर्ग — २२, २३, २४ / २५, २६, २७ / २८, २९, ३० (कुल योग ७२) अथवा १-९ संख्याओं का संयोजन जिनकी प्रत्येक रेखा का योग १५ हो। चारों ओर अष्ट-दल कमल एवं भूपुर। मध्य में "कुं" बीज एवं "कुबेराय नमः" मन्त्र अंकित।

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अधिष्ठात्री देवता

भगवान् कुबेर — शिव-गण के नायक, यक्षों के राजा, उत्तर दिशा के अधिपति, अष्ट-दिक्पाल में से एक। नवग्रहों में नहीं, परन्तु धन के सर्वोच्च देवता।

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मन्त्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः

Om Shreem Hreem Kleem Shreem Kleem Vitteshvaraya Namah

अर्थ: धनेश्वर कुबेर देव को नमन — अक्षय धन-वैभव प्रदान करें।

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ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन धान्याधिपतये धन धान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा

Om Yakshaya Kuberaya Vaishravanaya · Dhana-Dhanya-adhipataye · Dhana-Dhanya-Samriddhim Me Dehi Dapaya Svaha

अर्थ: धन-धान्य के स्वामी, यक्षेन्द्र कुबेर — मुझे धन एवं अन्न की समृद्धि प्रदान करें।

लाभ एवं फल

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दीर्घकालीन धन-स्थिरता
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व्यापार में लाभ-वृद्धि
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ऋण-नाश
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अनापेक्षित धन-लाभ
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सम्पत्ति-क्रय में सहायता
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दान-पुण्य की क्षमता
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स्थापना नियम

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सामग्री

स्वर्ण (श्रेष्ठतम), रजत, अष्टधातु, अथवा ताम्र पत्र पर अंकित। आधुनिक काल में सिद्ध-यन्त्र भी बाजार में उपलब्ध।

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दिशा

गृह अथवा कार्यालय की उत्तर दीवार पर। तिजोरी का मुख दक्षिण की ओर हो (तिजोरी उत्तर दीवार के सहारे)। साधक उत्तराभिमुख होकर पूजन करें।

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मुहूर्त

धनतेरस, दीवाली, अक्षय तृतीया, गुरु पुष्य योग, धन त्रयोदशी। शुक्रवार रात्रि अथवा शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी।