दश महाविद्या

दश महाविद्या

शक्ति के दस तान्त्रिक स्वरूप — काली से कमला तक

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दश महाविद्या परिचय

अन्य नाम / उपाधियाँ: दश महाविद्या, दश-शक्ति, दश-तान्त्रिक मातृका

दश महाविद्या = शक्ति के दस मुख्य तान्त्रिक स्वरूप। महाविद्या शब्द का अर्थ है "महान् ज्ञान" अथवा "महान् विद्या-शक्ति"। ये देवियाँ ब्राह्मी-शक्ति के दस विभिन्न रूप हैं — प्रत्येक का अपना अधिष्ठान, मन्त्र, यन्त्र, एवं सिद्धि-फल।

पुराण-कथा — सती ने पिता दक्ष की यज्ञ-स्थल पर प्रकट होने का प्रयास किया, परन्तु शिव की अनुमति नहीं मिली। तब सती के क्रोध से दश महाविद्याएँ प्रकट हुईं — दस दिशाओं को घेर कर शिव की निकास-राह रोक दी। शिव ने अनुमति दी।

दशों महाविद्याओं की साधना तान्त्रिक मार्ग का अंग — विशेष गुरु-दीक्षा आवश्यक। प्रत्येक सिद्धि "उच्चाटन, मारण, सम्मोहन, स्तम्भन" आदि क्रियाओं से सम्बन्धित। श्री विद्या (त्रिपुर सुन्दरी) सर्वाधिक सौम्य एवं प्रसिद्ध।

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स्वरूप एवं चित्रण

प्रत्येक महाविद्या का अलग-अलग रूप — काली श्याम चतुर्भुज नर-मुण्ड माला सहित, तारा नीली त्रि-नेत्रा, त्रिपुर सुन्दरी रक्तवर्णा सौम्य, भुवनेश्वरी श्वेता शान्त-स्वरूपा, छिन्नमस्ता आत्म-शिर-छेद कारिणी, भैरवी रक्तवर्णा, धूमावती धूम्र-वर्णा वृद्ध-रूप, बगलामुखी पीत-वर्णा शत्रु-स्तम्भिनी, मातंगी हरित-वर्णा संगीत-प्रिया, कमला कमल-वर्णा (लक्ष्मी रूप)।

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परिवार एवं सम्बन्ध

मूल स्वरूपआदि-शक्ति (पार्वती-सती)
पतिभगवान् शिव
धामश्मशान, कैलाश, एवं तीर्थ-स्थल
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प्रमुख मन्त्र

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं दश-महाविद्यायै नमः

Om Aim Hreem Shreem Dasha-Mahavidyayai Namah

अर्थ: दशों महाविद्याओं को सम्मिलित नमस्कार।

दार्शनिक प्रतीक

दश महाविद्या = "ज्ञान" का दशविध रूप। प्रत्येक रूप दर्शाता है — चेतना का एक स्तर। काली समय का काल; तारा रक्षा; सुन्दरी सौन्दर्य-शक्ति; भुवनेश्वरी विश्व-धात्री; छिन्नमस्ता आत्म-त्याग; भैरवी संहार-शक्ति; धूमावती वैधव्य-वैराग्य; बगलामुखी मौन-स्तम्भन; मातंगी अशुद्ध-शुद्धि (बहिष्कृत में पवित्र); कमला सौम्य-समृद्धि। दशों मिलकर "पूर्ण-शक्ति" का साकार रूप।

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दश महाविद्या के दस रूप

1

काली

काल-नाशिनी, श्याम-वर्णा, परम-तान्त्रिक देवी। बीज: क्रीं।

🔵2

तारा

सर्व-रक्षिका, नील-वर्णा, उग्र-तारा रूप में बौद्ध एवं हिन्दू दोनों परम्पराओं में पूजित।

🪷3

त्रिपुर सुन्दरी

षोडशी, ललिता-राजराजेश्वरी, श्री विद्या की मूल देवी। सौम्य एवं सुन्दर।

🌍4

भुवनेश्वरी

त्रि-लोक की अधिष्ठात्री, श्वेत-वर्णा, विश्व-धात्री।

⚔️5

छिन्नमस्ता

आत्म-शिर-छेदित, स्व-त्याग एवं उच्च-कुण्डलिनी की प्रतीक।

🔥6

त्रिपुर भैरवी

संहार-शक्ति, रक्त-वर्णा, उग्र-तप का प्रतीक।

🌫️7

धूमावती

धूम्र-वर्णा वृद्धा, विधवा-स्वरूपा, वैराग्य एवं अकेलेपन की देवी।

🟡8

बगलामुखी

पीत-वर्णा, शत्रु-स्तम्भनकारी एवं वाक्-स्तम्भनकारी देवी।

🟢9

मातंगी

हरित-वर्णा, संगीत एवं वाक्-शक्ति की तान्त्रिक देवी (सरस्वती की तान्त्रिक रूप)।

🪷10

कमला

कमलासना, लक्ष्मी की तान्त्रिक रूप — सौम्य महाविद्या।

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प्रमुख मन्दिर एवं तीर्थ