विन्ध्यवासिनी देवी

मिर्ज़ापुर में गंगा-तट का शक्ति-पीठ — त्रिकोण-यात्रा

देवियाँ

3 (त्रिकोण)

वाराणसी से

80 किमी

विशेष

नवरात्रि

विन्ध्यवासिनी देवी — उत्तर-प्रदेश के मिर्ज़ापुर जिले में। गंगा-तट पर। 51 शक्ति-पीठों में एक। माँ-सती की पीठ।

अद्वितीय: यहाँ 3-देवियाँ — महालक्ष्मी (विन्ध्यवासिनी), महाकाली (काली खोह), महासरस्वती (अष्टभुजा)।

त्रिकोण-यात्रा

1. **विन्ध्यवासिनी** (मुख्य): गंगा-तट।

2. **काली खोह**: 1 किमी, गुफा-मन्दिर।

3. **अष्टभुजा**: 4 किमी, पहाड़ पर।

3-दर्शन = सम्पूर्ण-यात्रा।

वैष्णवी-देवी-तुल्य परिक्रमा।

पौराणिक-कथा

विष्णु ने योगमाया को पृथ्वी पर भेजा।

कंस ने पटक-दिया।

योगमाया विन्ध्य-पर्वत पर अदृश्य।

विन्ध्यवासिनी-नाम।

देवी-भागवत-वर्णित।

दर्शन और मेले

सुबह 5 — रात्रि 10।

दैनिक-आरती 4 बार।

सर्व-दर्शन: निःशुल्क।

नवरात्रि: अति-भीड़।

कजरी-तीज: श्रावण-महीना।

गंगा-स्नान-संग।

मणिकर्णिका-घाट 80 किमी।

पहुँच

मिर्ज़ापुर से 8 किमी।

वाराणसी से 80 किमी।

प्रयागराज से 100 किमी।

नज़दीकी रेलवे: विन्ध्याचल।

हवाई: वाराणसी।

धर्मशाला आसपास।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिकोण-यात्रा क्या?

3 देवी-मन्दिर एक-यात्रा में: विन्ध्यवासिनी → काली खोह → अष्टभुजा। पैदल/रिक्शा। 3-4 घण्टे।

काशी से कैसे जायें?

सुबह काशी-दर्शन। दोपहर तक विन्ध्याचल (80 किमी)। सायं तक त्रिकोण-यात्रा। एक-दिन।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।