विन्ध्यवासिनी देवी — उत्तर-प्रदेश के मिर्ज़ापुर जिले में। गंगा-तट पर। 51 शक्ति-पीठों में एक। माँ-सती की पीठ।
अद्वितीय: यहाँ 3-देवियाँ — महालक्ष्मी (विन्ध्यवासिनी), महाकाली (काली खोह), महासरस्वती (अष्टभुजा)।
✦ त्रिकोण-यात्रा
1. **विन्ध्यवासिनी** (मुख्य): गंगा-तट।
2. **काली खोह**: 1 किमी, गुफा-मन्दिर।
3. **अष्टभुजा**: 4 किमी, पहाड़ पर।
3-दर्शन = सम्पूर्ण-यात्रा।
वैष्णवी-देवी-तुल्य परिक्रमा।
✦ पौराणिक-कथा
विष्णु ने योगमाया को पृथ्वी पर भेजा।
कंस ने पटक-दिया।
योगमाया विन्ध्य-पर्वत पर अदृश्य।
विन्ध्यवासिनी-नाम।
देवी-भागवत-वर्णित।
✦ दर्शन और मेले
सुबह 5 — रात्रि 10।
दैनिक-आरती 4 बार।
सर्व-दर्शन: निःशुल्क।
नवरात्रि: अति-भीड़।
कजरी-तीज: श्रावण-महीना।
गंगा-स्नान-संग।
मणिकर्णिका-घाट 80 किमी।
✦ पहुँच
मिर्ज़ापुर से 8 किमी।
वाराणसी से 80 किमी।
प्रयागराज से 100 किमी।
नज़दीकी रेलवे: विन्ध्याचल।
हवाई: वाराणसी।
धर्मशाला आसपास।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
त्रिकोण-यात्रा क्या?▼
3 देवी-मन्दिर एक-यात्रा में: विन्ध्यवासिनी → काली खोह → अष्टभुजा। पैदल/रिक्शा। 3-4 घण्टे।
काशी से कैसे जायें?▼
सुबह काशी-दर्शन। दोपहर तक विन्ध्याचल (80 किमी)। सायं तक त्रिकोण-यात्रा। एक-दिन।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।