कामाख्या-मन्दिर — असम के गुवाहाटी में नीलाचल-पर्वत पर। 51 शक्ति-पीठों में सर्वोच्च। माँ-सती की योनि गिरी थी। तन्त्र-साधना का मुख्य-केन्द्र।
मूर्ति-नहीं — योनि-शिला (लाल-स्राव-सहित) पूजी जाती। अम्बुबाची-मेला (जून) पर मन्दिर 3 दिन बन्द — माँ का मासिक-धर्म।
✦ इतिहास
मन्दिर 8वीं सदी का। 16वीं सदी में राजा नर-नारायण ने पुनर्निर्माण किया।
दक्ष-यज्ञ-कथा। शिव सती-शव लेकर तांडव। विष्णु ने सुदर्शन-चक्र से 51 भागों में काटा।
योनि-भाग कामाख्या-स्थान पर गिरी।
✦ अम्बुबाची-मेला
जून मध्य (आषाढ़ शुक्ल-पक्ष)। 4 दिन।
मन्दिर 3 दिन पूर्ण-बन्द।
चौथा दिन: माँ-स्नान। मन्दिर खुलता।
भक्तों को लाल-वस्त्र-टुकड़े (माँ का स्राव-चिह्न) प्रसाद।
तान्त्रिक-साधक एकत्र होते।
✦ दर्शन-विधि
गुवाहाटी रेलवे-स्टेशन से 8 किमी।
दर्शन-समय: सुबह 5:30 — दोपहर 1:00, सायं 2:30 — रात 5:30।
VIP-दर्शन: ₹500।
सामान्य-दर्शन: निःशुल्क, 2-4 घण्टे।
नवरात्रि और अम्बुबाची पर भारी-भीड़।
फूल, सिन्दूर, साड़ी, बकरी (बलि-परम्परा) चढ़ाते।
✦ 10 महाविद्या
कामाख्या-परिसर में 10 महाविद्या-मन्दिर: काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला।
तान्त्रिक-साधना का सम्पूर्ण-तीर्थ।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अम्बुबाची-मेला में जाना सही?▼
हाँ, अति-शुभ। तान्त्रिक-साधक विशेष। सामान्य-भक्त भी जाते। पहले से बुकिंग।
कामाख्या में बलि?▼
पारम्परिक-बकरी, कबूतर। आधुनिक-समय में नारियल/कद्दू-बलि भी स्वीकार्य।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।