कामाख्या मन्दिर

नीलाचल-पर्वत पर माँ-सती की योनि — सर्वोच्च शक्ति-पीठ

स्थान

गुवाहाटी

विशेष

अम्बुबाची

महाविद्या

10

कामाख्या-मन्दिर — असम के गुवाहाटी में नीलाचल-पर्वत पर। 51 शक्ति-पीठों में सर्वोच्च। माँ-सती की योनि गिरी थी। तन्त्र-साधना का मुख्य-केन्द्र।

मूर्ति-नहीं — योनि-शिला (लाल-स्राव-सहित) पूजी जाती। अम्बुबाची-मेला (जून) पर मन्दिर 3 दिन बन्द — माँ का मासिक-धर्म।

इतिहास

मन्दिर 8वीं सदी का। 16वीं सदी में राजा नर-नारायण ने पुनर्निर्माण किया।

दक्ष-यज्ञ-कथा। शिव सती-शव लेकर तांडव। विष्णु ने सुदर्शन-चक्र से 51 भागों में काटा।

योनि-भाग कामाख्या-स्थान पर गिरी।

अम्बुबाची-मेला

जून मध्य (आषाढ़ शुक्ल-पक्ष)। 4 दिन।

मन्दिर 3 दिन पूर्ण-बन्द।

चौथा दिन: माँ-स्नान। मन्दिर खुलता।

भक्तों को लाल-वस्त्र-टुकड़े (माँ का स्राव-चिह्न) प्रसाद।

तान्त्रिक-साधक एकत्र होते।

दर्शन-विधि

गुवाहाटी रेलवे-स्टेशन से 8 किमी।

दर्शन-समय: सुबह 5:30 — दोपहर 1:00, सायं 2:30 — रात 5:30।

VIP-दर्शन: ₹500।

सामान्य-दर्शन: निःशुल्क, 2-4 घण्टे।

नवरात्रि और अम्बुबाची पर भारी-भीड़।

फूल, सिन्दूर, साड़ी, बकरी (बलि-परम्परा) चढ़ाते।

10 महाविद्या

कामाख्या-परिसर में 10 महाविद्या-मन्दिर: काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला।

तान्त्रिक-साधना का सम्पूर्ण-तीर्थ।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अम्बुबाची-मेला में जाना सही?

हाँ, अति-शुभ। तान्त्रिक-साधक विशेष। सामान्य-भक्त भी जाते। पहले से बुकिंग।

कामाख्या में बलि?

पारम्परिक-बकरी, कबूतर। आधुनिक-समय में नारियल/कद्दू-बलि भी स्वीकार्य।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।