कन्याकुमारी मन्दिर

भारत का दक्षिणी-छोर — माँ कुमारी का धाम

संगम

3 समुद्र

शक्ति-पीठ

51 में एक

विशेष

उदय+अस्त

कन्याकुमारी-मन्दिर — तमिलनाडु के सबसे-दक्षिणी छोर पर। माँ-कुमारी (पार्वती के कुमारी-रूप) का धाम। हिन्द-महासागर, बंगाल-की-खाड़ी, अरब-सागर — तीन-समुद्र-संगम।

51 शक्ति-पीठों में एक — सती की पीठ-कमर गिरी। उदय-अस्त-दोनों दर्शन का अद्वितीय-स्थल।

पौराणिक-कथा

पार्वती ने शिव से विवाह हेतु तपस्या की कुमारी-रूप में।

देवताओं की रक्षा हेतु बानासुर-वध करना था कुमारी से ही।

विवाह-मुहूर्त चूका: नारद ने मुर्गा बनाकर रात्रि में बाँग दी।

कुमारी आजीवन-कुमारी रहीं। बानासुर-वध किया।

मन्दिर में हीरे की नाक-नथ — समुद्र से 50 किमी दूर से दिखती।

दर्शन-स्थल

कन्याकुमारी-मन्दिर: मुख्य।

विवेकानन्द-शिला: समुद्र में 500 मी दूर। फेरी।

तिरुवल्लुवर-प्रतिमा: 133 फीट ऊँची।

गाँधी-स्मारक मण्डपम्।

सूर्य-उदय और सूर्य-अस्त: एक ही स्थान से। विश्व में अद्वितीय।

विशेष-समय

चैत्र-पूर्णिमा (मार्च-अप्रैल): विशेष-दर्शन।

चित्रा-पौर्णमी: सूर्योदय और चन्द्रोदय एक-साथ।

नवरात्रि: विशेष-पूजा।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विवेकानन्द-शिला कैसे जायें?

फेरी ₹50/व्यक्ति। हर 30 मिनट। समुद्र-तटीय हवा। ध्यान-मण्डपम्।

सर्वोत्तम-समय?

अक्टूबर-फरवरी। चित्रा-पौर्णमी (अप्रैल) विशेष।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।