कन्या-पूजन — नवरात्रि की अष्टमी या नवमी पर 9 कन्याओं को साक्षात्-नवदुर्गा मानकर पूजा। 2-10 वर्ष की आयु। 2026: चैत्र-अष्टमी 26 मार्च, शारदीय-अष्टमी 17 अक्टूबर।
✦ कन्या-पूजन की विधि
9 कन्या (2-10 वर्ष) + 1 बालक (बटुक-भैरव) बुलायें।
मुख्य-द्वार पर स्वागत — पैर-धोयें। तिलक-कुंकुम।
भोजन: पूरी, हलवा, चना (काले या सफेद), नारियल। मीठा।
दक्षिणा-वस्त्र: ₹51-101 + ribbon/clip/bracelet/नये-वस्त्र।
चरण-स्पर्श + आशीर्वाद।
गरीब/पास के स्कूल/अनाथालय की कन्याएँ बुलाना श्रेष्ठ।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कन्या न मिलें तो?▼
पास के मन्दिर में कन्या-भोज-दान। या परिवार की कन्याएँ। 9 की संख्या पूरी करें।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।