✦ महाविद्या यन्त्र ✦
✦ दश महाविद्या देवियों का संयुक्त यन्त्र ✦
✦ महाविद्या यन्त्र क्या है? ✦
महाविद्या यन्त्र — दश महाविद्या देवियों की संयुक्त शक्ति का यन्त्र। दश महाविद्याएँ शक्ति के दस तान्त्रिक रूप हैं — काली, तारा, त्रिपुर सुन्दरी (षोडशी), भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, और कमला।
यह यन्त्र विशेष तान्त्रिक साधनाओं का अंग है। प्रत्येक महाविद्या की अपनी विशेष शक्ति है — काली काल-नाशिनी, तारा रक्षिका, त्रिपुर सुन्दरी सौन्दर्य-दात्री, बगलामुखी शत्रु-स्तम्भनकारी, इत्यादि।
महाविद्या साधना उग्र है — इसे सिद्ध गुरु के निर्देशन में ही करना चाहिए। दशों यन्त्र एक स्थान पर रखकर पूजा करना ही "दश महाविद्या पीठ" कहलाता है। यह पीठ अत्यन्त शक्तिशाली एवं रक्षात्मक माना जाता है।
✦ ज्यामितीय रचना ✦
केन्द्र में बिन्दु एवं काली का बीज ("क्रीं") — दश त्रिकोणों का संयोग जिसमें प्रत्येक त्रिकोण एक महाविद्या का प्रतिनिधित्व करता है। बाहर दस-दल कमल, सोलह-दल कमल, द्वि-वृत्त, एवं भूपुर। प्रत्येक दिशा-कोण में एक महाविद्या का बीज मन्त्र।
✦ अधिष्ठात्री देवता ✦
दश महाविद्या — काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला। ये शक्ति की दस उग्र-सौम्य-मिश्रित अभिव्यक्तियाँ हैं।
✦ मन्त्र ✦
ॐ क्रीं काली · ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट् तारा · ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्रीमात्रे नमः सुन्दरी · ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः · ॐ ह्रीं श्रीं हुं छिन्नमस्तायै फट् · ॐ ऐं ह्रीं श्रीं भैरव्यै नमः · ॐ धूं धूमावत्यै स्वाहा · ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः · ॐ ऐं ह्रीं श्रीं नमो भगवती मातंग्यै फट् · ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमलात्मिकायै नमः
Om Kreem Kali · Om Hreem Streem Hum Phat Tara · Om Aim Hreem Shreem Shrimatre Namah Sundari · Om Hreem Bhuvaneshwaryai Namah · Om Hreem Shreem Hum Chhinnamastayai Phat · Om Aim Hreem Shreem Bhairavyai Namah · Om Dhum Dhumavatyai Svaha · Om Hleem Bagalamukhyai Namah · Om Aim Hreem Shreem Namo Bhagavati Matangyai Phat · Om Shreem Hreem Shreem Kamalatmikayai Namah
अर्थ: दशों महाविद्याओं का संयुक्त बीज मन्त्र — सम्पूर्ण शक्ति का आह्वान। दीक्षा-गुरु से प्राप्त करना अनिवार्य।
✦ लाभ एवं फल ✦
✦ स्थापना नियम ✦
सामग्री
अष्टधातु (श्रेष्ठतम), श्वेत स्फटिक, रक्त-चन्दन। प्रत्येक यन्त्र अलग-अलग धातु पर भी बनता है — काली ताम्र पर, बगलामुखी पीत-स्वर्ण पर, इत्यादि।
दिशा
विशेष पूजा-कक्ष की उत्तर अथवा पूर्व दीवार। साधक प्रात:काल पूर्वाभिमुख होकर पूजन करें। तान्त्रिक साधना में रात्रि भी प्रयुक्त होती है।
मुहूर्त
अमावस्या (विशेषतः कार्तिक), नवरात्रि (विशेष काली रात्रि), ग्रहण-काल (तान्त्रिक साधना हेतु अति-शुभ)।