✦ भगवान् विष्णु ✦
✦ त्रिमूर्ति में पालनकर्त्ता — सम्पूर्ण जगत् के पालक ✦
✦ भगवान् विष्णु परिचय ✦
अन्य नाम / उपाधियाँ: नारायण, हरि, केशव, माधव, जनार्दन, गोविन्द, मुकुन्द, अच्युत, पद्मनाभ
भगवान् विष्णु हिन्दू त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) के द्वितीय एवं सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के पालनकर्त्ता हैं। ऋग्वेद से लेकर पुराण-साहित्य तक उनका विस्तृत वर्णन मिलता है। वैष्णव सम्प्रदाय में वे सर्वोच्च परमेश्वर के रूप में पूजित हैं।
विष्णु का अर्थ है "व्यापनशील" — जो सर्वत्र व्याप्त है। नारायण नाम का अर्थ है "जल में निवास करने वाला" तथा "मनुष्य का आश्रय"। विष्णु क्षीर सागर में शेषनाग पर शयन करते हैं, माँ लक्ष्मी उनके चरण दबाती हैं, और नाभि से कमल पर ब्रह्मा प्रकट होते हैं।
जब अधर्म बढ़ता है, तब भगवान् विष्णु पृथ्वी पर अवतरित होकर धर्म की पुनः-स्थापना करते हैं — यही "अवतार" सिद्धान्त है। दश-अवतार प्रसिद्ध हैं — मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि।
✦ स्वरूप एवं चित्रण ✦
चतुर्भुज — चार हाथों में शंख (पाञ्चजन्य), चक्र (सुदर्शन), गदा (कौमोदकी), और पद्म (कमल)। श्याम-वर्ण काया, श्वेत पीताम्बर, कौस्तुभ मणि एवं वनमाला। मस्तक पर मुकुट, कानों में कुण्डल। शेषनाग के फण के छाता तले शयन-मुद्रा में अथवा गरुड़ पर आरूढ़।
✦ परिवार एवं सम्बन्ध ✦
✦ प्रमुख मन्त्र ✦
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
Om Namo Bhagavate Vasudevaya
अर्थ: भगवान् वासुदेव (विष्णु-कृष्ण) को नमस्कार। द्वादशाक्षरी मन्त्र — सर्व-पाप-नाशक एवं मोक्ष-दायक।
ॐ नमो नारायणाय
Om Namo Narayanaya
अर्थ: नारायण को नमस्कार। अष्टाक्षरी मन्त्र — विष्णु का परम मन्त्र।
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम् । विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्॥
Shantakaram Bhujaga-shayanam Padma-nabham Suresham · Vishvadharam Gagana-sadrisham Megha-varnam Shubha-angam
अर्थ: शान्त रूप वाले, सर्प पर शयन करने वाले, कमल-नाभ, देवों के अधिपति, विश्व के आधार, आकाश के समान विशाल, मेघ-वर्ण के शुभ-अंगों वाले विष्णु को नमन।
✦ दार्शनिक प्रतीक ✦
विष्णु "सत्त्व-गुण" (शुद्धता, ज्ञान, करुणा) के प्रतीक हैं। चार आयुधों का अर्थ — शंख (शब्द/नाद का प्रतीक), चक्र (काल एवं धर्म का चक्र), गदा (तप एवं संस्कार-शक्ति), पद्म (विवेक एवं विराग)। शेष-शयन का अर्थ — कालचक्र के अनन्त प्रवाह में स्थिर परम-तत्त्व। विष्णु-दर्शन = पालन का सिद्धान्त — रक्षण, अनुग्रह, मर्यादा।