श्रीरंगनाथ स्वामी

विश्व का सबसे बड़ा कार्यरत-हिन्दू-मन्दिर

क्षेत्र

156 एकड़

गोपुरम्

21

मुख्य-गोपुरम्

236 फुट

श्रीरंगनाथ-स्वामी मन्दिर — तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के पास। श्रीरंगम्-द्वीप पर। विश्व का सबसे बड़ा कार्यरत-हिन्दू-मन्दिर। 156 एकड़।

108 दिव्य-देशम् में प्रथम। विष्णु अनन्त-शयन-मुद्रा। रामानुजाचार्य का प्रमुख-स्थल।

विशेषताएँ

7 परकोटे (दीवारें)।

21 गोपुरम्।

मुख्य-गोपुरम् (दक्षिण): 236 फीट — एशिया का सबसे ऊँचा।

UNESCO-नामांकित।

चोल-पाण्ड्य-होयसल-विजयनगर-वंशों ने बनाया।

गारुड़-मण्डपम्: 16वीं सदी।

1000-स्तम्भ-हॉल।

दर्शन

सुबह 6 — दोपहर 1, सायं 3 — रात्रि 9।

गर्भ-गृह: 4 दर्शन-समय।

VIP-दर्शन: ₹250।

अभिषेक: ₹500-1500।

उत्सवर्थी विशेष-दर्शन।

नित्य-कल्याणम्।

विशेष-त्योहार

वैकुण्ठ-एकादशी (मार्गशीर्ष शुक्ल): स्वर्ग-द्वार-दर्शन। 2026: 1 जनवरी।

21 दिन का ब्रह्मोत्सव।

रथ-यात्रा।

पगल-पथु-इरापथु-त्योहार: 21 दिन।

पहुँच

तिरुचिरापल्ली रेलवे + हवाई।

चेन्नई से 320 किमी।

मदुरै से 130 किमी।

तंजौर से 60 किमी।

तंजौर + त्रिची + मदुरै 3-दिन-यात्रा।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

108 दिव्य-देशम् में प्रथम?

12 आल्वारों (वैष्णव-संत) ने पूजे 108 दिव्य-स्थल। श्रीरंगम् सर्वोच्च, "भू-वैकुण्ठ" कहलाता।

वैकुण्ठ-एकादशी विशेष?

इस-दिन उत्तर-द्वार (वैकुण्ठ-द्वार) खुलता। मान्यता: इस-दिन मरण = मोक्ष-गारंटी।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।