भगवान् गणेश

भगवान् गणेश

गणपति, विघ्नहर्ता — प्रथम पूज्य देवता

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भगवान् गणेश परिचय

अन्य नाम / उपाधियाँ: गणपति, गणेश, विनायक, विघ्नहर्ता, लम्बोदर, एकदन्त, गजानन, सिद्धिविनायक, मोदकप्रिय

भगवान् गणेश — शिव-पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र, गणों के अधिपति, विघ्नहर्ता एवं बुद्धि के अधिष्ठाता देवता। हिन्दू परम्परा में किसी भी कार्य का प्रारम्भ "श्री गणेशाय नमः" से होता है — इसीलिए वे "प्रथम पूज्य" हैं।

पुराणकथा — पार्वती ने अपने स्नान-कक्ष की रक्षा हेतु एक बालक की रचना की। शिव के क्रोध से उसका शिर कट गया, परन्तु पार्वती के विलाप पर शिव ने एक हाथी का शिर लगाकर पुनः जीवन-दान दिया — गजानन रूप।

गणेश की हर शारीरिक विशेषता एक गहन प्रतीक है — विशाल मस्तक (विस्तृत बुद्धि), छोटी आँखें (सूक्ष्म दृष्टि), बड़े कान (अधिक श्रवण), छोटा मुख (कम बोलना), लम्बी सूँड़ (अनुकूलन-शक्ति), लम्बोदर (सब कुछ ग्रहण करने की क्षमता), एक दन्त (एकाग्रता)। मूषक वाहन — भौतिक इच्छाओं पर नियन्त्रण।

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स्वरूप एवं चित्रण

गजमुख — हाथी का शिर, मानव शरीर। चतुर्भुज — हाथों में पाश (बन्धन), अंकुश (नियन्त्रण), मोदक (मधुर फल), एवं वरद-मुद्रा। एक दन्त (दूसरा खण्डित)। कमर में नाग बन्धन, पीताम्बर। विशाल उदर, मूषक पर बैठे अथवा खड़े। मस्तक पर मुकुट अथवा त्रिपुण्ड्र।

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परिवार एवं सम्बन्ध

पिताभगवान् शिव
मातापार्वती
भाईकार्तिकेय (मुरुगन)
पत्नीरिद्धि एवं सिद्धि
पुत्रशुभ एवं लाभ
वाहनमूषक (मूषिक/चूहा)
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प्रमुख मन्त्र

ॐ गं गणपतये नमः

Om Gam Ganapataye Namah

अर्थ: गणपति को नमस्कार। षडक्षरी मूल मन्त्र — सर्व-विघ्न नाशक।

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व कार्येषु सर्वदा॥

Vakratunda Mahakaya Surya Koti Samaprabha · Nirvighnam Kuru Me Deva Sarva Karyeshu Sarvada

अर्थ: वक्र शुण्ड वाले, विशाल काया वाले, करोड़ों सूर्य के समान तेजस्वी देव — मेरे समस्त कार्यों में सर्वदा निर्विघ्नता प्रदान करें।

ॐ श्री गणेशाय नमः

Om Sri Ganeshaya Namah

अर्थ: श्री गणेश को नमस्कार — सरल पूजन-मन्त्र।

दार्शनिक प्रतीक

गणेश "ओंकार" का साकार रूप — उनका शरीर "ॐ" अक्षर के सदृश आकृति है। हाथी का शिर = प्रज्ञा (विशाल बुद्धि), मानव शरीर = कर्म-शक्ति। चार हाथ = चार अवस्थाएँ (जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति, तुरीय)। मूषक = क्षुद्र अहंकार जिस पर बुद्धि-गणेश सवार है। मोदक = साधना का मधुर फल — मोक्ष। एक दन्त = एकाग्रता एवं साधक की त्याग-वृत्ति।

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प्रमुख मन्दिर एवं तीर्थ