✦ श्री गणेश यन्त्र ✦
✦ विघ्न-नाशक एवं कार्य-सिद्धि का यन्त्र ✦
✦ श्री गणेश यन्त्र क्या है? ✦
श्री गणेश यन्त्र — हिन्दू देवों में सर्व-प्रथम पूज्य भगवान् गणेश की शक्ति का यन्त्र। प्रत्येक पूजा-कार्य का प्रारम्भ गणेश से होता है — "वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ — निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व कार्येषु सर्वदा"।
गणेश यन्त्र समस्त विघ्नों के नाश एवं नये कार्यों में सिद्धि-प्राप्ति का सर्वोत्तम उपाय है। नये व्यापार, नवीन शिक्षा, गृह-निर्माण, यात्रा — किसी भी कार्य के आरम्भ पर इसकी स्थापना अति-शुभ।
विद्यार्थी विशेष रूप से इस यन्त्र की पूजा करते हैं — एकाग्रता, बुद्धि-वृद्धि, परीक्षा में सफलता हेतु। बुधवार गणेश की वाहन-दिशा का दिन है, अतः इस दिन यन्त्र-पूजा सर्वश्रेष्ठ।
✦ ज्यामितीय रचना ✦
केन्द्र में बिन्दु — चार त्रिकोणों के संयोग से अष्टकोण — अष्ट-दल कमल — द्वादश-दल कमल — वृत्त — भूपुर। मध्य बिन्दु में "गं" बीज मन्त्र अंकित। ८ दलों पर ८ सिद्धियाँ (अणिमा, महिमा आदि) एवं १२ दलों पर १२ रिद्धियाँ अंकित।
✦ अधिष्ठात्री देवता ✦
श्री गणेश — शिव-पार्वती के प्रथम पुत्र, गणपति, विघ्न-हर्ता, बुद्धि के अधिष्ठात्री देवता। हाथी का मुख — विशालता एवं ज्ञान का प्रतीक।
✦ मन्त्र ✦
ॐ गं गणपतये नमः
Om Gam Ganapataye Namah
अर्थ: गणपति देव को नमन — विघ्न-नाश एवं कार्य-सिद्धि के देवता।
अनुशंसित जप: 108 बार
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व कार्येषु सर्वदा॥
Vakratunda Mahakaya Surya Koti Samaprabha · Nirvighnam Kuru Me Deva Sarva Karyeshu Sarvada
अर्थ: वक्र शुण्ड वाले, विशाल काया वाले, करोड़ों सूर्य के समान तेजस्वी देव — मेरे समस्त कार्यों में सर्वदा निर्विघ्नता प्रदान करें।
✦ लाभ एवं फल ✦
✦ स्थापना नियम ✦
सामग्री
ताम्र पत्र (श्रेष्ठतम), अष्टधातु, स्वर्ण, अथवा भूर्ज पत्र। बुधवार को निर्मित यन्त्र विशेष फलदायी।
दिशा
पूजा-गृह में उत्तर-पूर्व कोण; अध्ययन कक्ष में पूर्व दीवार। साधक का मुख उत्तर अथवा पूर्व की ओर हो।
मुहूर्त
गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी, बुधवार, गुरु पुष्य योग। प्रातः-काल अथवा सायं प्रदोष काल।