मेहंदीपुर बालाजी — राजस्थान के दौसा जिले में। बालाजी (हनुमान) का प्रसिद्ध मन्दिर। 1000 वर्ष पुराना।
विशेष: भूत-प्रेत-बाधा-निवारण। तन्त्रिक-आक्रमण-सुरक्षा। 5-7 लाख श्रद्धालु मासिक।
✦ मन्दिर की विशेषताएँ
बालाजी (हनुमान), भैरव, प्रेत-राज तीन-प्रतिमाएँ।
स्व-प्रकटित-मूर्तियाँ।
भूत-प्रेत-निवारण-स्थल।
सरकार ने 1981 में पंजीकृत।
परिसर में सख्त-नियम।
✦ अनोखे-नियम
प्रसाद घर न-ले जायें (उल्टा-असर)।
मन्दिर-छोड़ने पर पीछे न-देखें।
बाहर-जाते समय मन्दिर-छाया भी न-पड़े।
भोजन: चना-गुड़, फल।
भारी-भोज वर्जित।
परिसर में मांस-मद्य कठोर-वर्जित।
मन्दिर-दर्शन के बाद सीधे घर।
✦ दर्शन-समय
सुबह 6 — दोपहर 1, सायं 3 — रात्रि 9।
मंगल-शनिवार: अति-भीड़।
तीन-आरतियाँ: सुबह, दोपहर, सायं।
दरख्वास्त (अर्जी)-लेखन।
सवामणि (125 किलो भोग) सेवा।
भोग-वितरण मन्दिर-में।
✦ पहुँच
जयपुर से 105 किमी।
दौसा से 35 किमी।
हवाई: जयपुर।
रेलवे: बांदीकुई जंक्शन (35 किमी)।
दिल्ली से 235 किमी।
धर्मशाला आसपास।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या वास्तव में भूत-निवारण?▼
मान्यता-आधारित। हजारों भक्त लाभ-दावा करते। मनोवैज्ञानिक-आध्यात्मिक-शक्ति। चिकित्सकीय-मामलों में डॉक्टर-संग।
सवामणि क्या?▼
125 किलो भोग। बूँदी, रबड़ी, मिठाई। मन्दिर-में दान। मनोकामना-पूर्ण होने पर।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।