मेहंदीपुर बालाजी

राजस्थान का भूत-प्रेत-निवारण-केन्द्र

देवता

बालाजी

मासिक भक्त

5-7 लाख

नियम

प्रसाद-न-घर

मेहंदीपुर बालाजी — राजस्थान के दौसा जिले में। बालाजी (हनुमान) का प्रसिद्ध मन्दिर। 1000 वर्ष पुराना।

विशेष: भूत-प्रेत-बाधा-निवारण। तन्त्रिक-आक्रमण-सुरक्षा। 5-7 लाख श्रद्धालु मासिक।

मन्दिर की विशेषताएँ

बालाजी (हनुमान), भैरव, प्रेत-राज तीन-प्रतिमाएँ।

स्व-प्रकटित-मूर्तियाँ।

भूत-प्रेत-निवारण-स्थल।

सरकार ने 1981 में पंजीकृत।

परिसर में सख्त-नियम।

अनोखे-नियम

प्रसाद घर न-ले जायें (उल्टा-असर)।

मन्दिर-छोड़ने पर पीछे न-देखें।

बाहर-जाते समय मन्दिर-छाया भी न-पड़े।

भोजन: चना-गुड़, फल।

भारी-भोज वर्जित।

परिसर में मांस-मद्य कठोर-वर्जित।

मन्दिर-दर्शन के बाद सीधे घर।

दर्शन-समय

सुबह 6 — दोपहर 1, सायं 3 — रात्रि 9।

मंगल-शनिवार: अति-भीड़।

तीन-आरतियाँ: सुबह, दोपहर, सायं।

दरख्वास्त (अर्जी)-लेखन।

सवामणि (125 किलो भोग) सेवा।

भोग-वितरण मन्दिर-में।

पहुँच

जयपुर से 105 किमी।

दौसा से 35 किमी।

हवाई: जयपुर।

रेलवे: बांदीकुई जंक्शन (35 किमी)।

दिल्ली से 235 किमी।

धर्मशाला आसपास।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या वास्तव में भूत-निवारण?

मान्यता-आधारित। हजारों भक्त लाभ-दावा करते। मनोवैज्ञानिक-आध्यात्मिक-शक्ति। चिकित्सकीय-मामलों में डॉक्टर-संग।

सवामणि क्या?

125 किलो भोग। बूँदी, रबड़ी, मिठाई। मन्दिर-में दान। मनोकामना-पूर्ण होने पर।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।