सालासर बालाजी

राजस्थान का दाढ़ी-मूँछ-वाला अद्वितीय हनुमान

स्थापना

1754 ई.

विशेष

दाढ़ी-मूँछ

मेला

चैत्र+आश्विन

सालासर बालाजी — राजस्थान के चूरू जिले में। हनुमान-मन्दिर। 1754 ई. में स्थापित। दाढ़ी-मूँछ-वाले हनुमान।

विशेष: एकमात्र हनुमान-मन्दिर जहाँ बालाजी की दाढ़ी-मूँछ हैं। मूर्ति-स्व-प्रकट खेत में मिली।

पौराणिक-कथा

1754 ई. नागौर में किसान को खेत-जोतते समय मूर्ति मिली।

मोहनदास (सालासर के संत) ने पहचाना।

सालासर लाये।

मन्दिर-स्थापना।

हनुमान ने मोहनदास को सपने में दाढ़ी-मूँछ-स्वरूप दिखाया।

तब से अद्वितीय-स्वरूप।

अद्वितीय-विशेषताएँ

दाढ़ी-मूँछ-वाले हनुमान।

सोने का मुकुट।

चाँदी का छत्र।

दैनिक-शृंगार।

चोला-वस्त्र।

मूर्ति बैठी-मुद्रा।

दर्शन और मेले

सुबह 5 — रात्रि 10।

चैत्र-पूर्णिमा-मेला (हनुमान-जयन्ती): अप्रैल।

आश्विन-पूर्णिमा-मेला: अक्टूबर।

सर्व-दर्शन: निःशुल्क।

सोने का छत्र-दर्शन: ₹100।

दैनिक-आरती 5 बार।

सवा-मणी (125 kg बूँदी) सेवा।

पहुँच

जयपुर से 175 किमी।

चूरू से 60 किमी।

सीकर से 60 किमी।

नज़दीकी रेलवे: सालासर हाल्ट (5 किमी)।

हवाई: जयपुर।

दिल्ली से 320 किमी।

होटल-धर्मशाला आसपास।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दाढ़ी-मूँछ क्यों?

मोहनदास के सपने में हनुमान ने इस-स्वरूप में आज्ञा दी। श्रद्धा-आधारित अद्वितीय-स्वरूप।

मेहंदीपुर और सालासर में अन्तर?

मेहंदीपुर: भूत-प्रेत-निवारण। सालासर: सर्व-मनोकामना-पूर्ति। दोनों राजस्थान।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।