खाटू श्याम जी

राजस्थान का बर्बरीक-धाम — कलियुग का कृष्ण

मूर्ति

मात्र-शीश

मेला 2026

23-25 फरवरी

भक्त

30+ लाख

खाटू श्याम जी — राजस्थान के सीकर जिले के खाटू-गाँव में। बर्बरीक (भीम-पौत्र) का मन्दिर। श्रीकृष्ण ने "श्याम" नाम दिया।

कलि-युग में कृष्ण-स्वरूप। हारे का सहारा। फाल्गुन-मेला सबसे-बड़ा।

बर्बरीक-कथा

बर्बरीक: घटोत्कच का पुत्र, भीम का पौत्र।

3-बाण-वरदान — किसी-भी-युद्ध-जीत-शक्ति।

महाभारत-युद्ध-पूर्व कौन-जीते देखने आये।

कृष्ण ने ब्राह्मण-वेश में परीक्षा।

बर्बरीक ने कहा: "हारने वाले की तरफ लड़ूँगा।"

कृष्ण ने सिर-दान-माँगा।

बर्बरीक ने हँसकर सिर-दिया।

कृष्ण ने वरदान दिया: कलि-युग में मेरे नाम (श्याम) से पूजे जाओगे।

मन्दिर-विशेष

मूर्ति: मात्र-शीश।

हीरे-जड़ित मुकुट।

मोर-पंख।

दैनिक-शृंगार।

नीला-वस्त्र।

गुलाब-फूल विशेष।

कीर्तन-संस्कृति।

फाल्गुन-मेला (लक्खी-मेला)

फाल्गुन शुक्ल नवमी से एकादशी।

2026: 23-25 फरवरी।

30+ लाख श्रद्धालु।

7-दिन-7-रात-दर्शन।

रिंगस से पैदल-यात्रा।

भजन-कीर्तन।

गुलाब-निशान वाला झण्डा।

दर्शन-नियम

सुबह 5 — दोपहर 1, सायं 3 — रात्रि 10।

VIP: ₹100।

आरती: मंगला (5:30), श्रृंगार (8), भोग (12), संध्या (7), शयन (9:30)।

मांस-मद्य परिसर-वर्जित।

फोटो-वर्जित-गर्भ-गृह।

कीर्तन-स्थल अलग।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलियुग में कृष्ण क्यों खाटू-श्याम?

मान्यता: कलि-युग में मूल-कृष्ण से बर्बरीक की भक्ति-बल अधिक स्वीकार्य। हारे का सहारा।

पैदल-यात्रा कब?

फाल्गुन-मेला में रिंगस से 16 किमी पैदल। दैनिक-वर्ष-भर भी सम्भव।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।