वृन्दावन — उत्तर-प्रदेश के मथुरा-जिले में, यमुना-तट पर। श्रीकृष्ण की बाल-लीला-भूमि। 7000+ कृष्ण-राधा मन्दिर।
वैष्णव-सम्प्रदाय का सर्वोच्च-तीर्थ। चैतन्य महाप्रभु, स्वामी हरिदास, मीराबाई के साधना-स्थल।
✦ मुख्य 12 मन्दिर
1. **बांके बिहारी**: सर्व-प्रसिद्ध।
2. **इस्कॉन (कृष्ण-बलराम)**: अंतर्राष्ट्रीय।
3. **राधा-रमण**।
4. **राधा-वल्लभ**।
5. **गोविन्द-देव-जी** (मूल-स्थान)।
6. **राधा-दामोदर**।
7. **रंगनाथ-जी** (दक्षिण-शैली)।
8. **मदन-मोहन**।
9. **शाह-जी मन्दिर**।
10. **प्रेम-मन्दिर**।
11. **निधि-वन**: कृष्ण-राधा रात-रास।
12. **सेवा-कुञ्ज**।
✦ दैनिक-दर्शन-कार्यक्रम
बांके-बिहारी: 7:45 AM — 12 PM, 5:30 PM — 9:30 PM।
मंगला-आरती: 4:30 AM (जन्माष्टमी)।
इस्कॉन: 4:30 AM शयन-भंग, फिर निरन्तर।
सब-मन्दिर: सर्दियों में समय-बदलाव।
✦ विशेष-दिन और परिक्रमा
जन्माष्टमी (अगस्त-सितम्बर)।
राधाष्टमी (8 दिन-पश्चात)।
कृष्ण-होली (बरसाना से शुरू)।
कार्तिक-मास: मांगलिक।
परिक्रमा: 11 किमी, 4-5 घण्टे। शाम-समय श्रेष्ठ।
गोवर्धन-परिक्रमा साथ: 21 किमी।
✦ पहुँच और आवास
मथुरा-जंक्शन से 12 किमी।
दिल्ली: 180 किमी।
हवाई: आगरा (60 किमी), दिल्ली।
आगरा-यमुना एक्सप्रेसवे।
आवास: इस्कॉन गेस्टहाउस, धर्मशालाएँ, होटल।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वृन्दावन और मथुरा एक-साथ?▼
हाँ — 12 किमी दूरी। 1-2 दिन में दोनों दर्शन। गोकुल भी पास (15 किमी)।
निधि-वन का रहस्य?▼
मान्यता: कृष्ण-राधा रात्रि में आज भी रास-लीला करते। रात्रि किसी को रहने की अनुमति नहीं।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।