वैद्यनाथ ज्योतिर्लिङ्ग

देवघर में रोग-निवारक 9वाँ ज्योतिर्लिङ्ग

स्थान

देवघर

मेला

श्रावणी

कांवड़

105 किमी

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिङ्ग — झारखण्ड के देवघर में। 12-ज्योतिर्लिङ्ग में 9वाँ। "वैद्य-नाथ" = रोग-निवारक। रोग-मुक्ति का धाम।

51 शक्ति-पीठों में एक — हृदय-भाग। शिव+सती दोनों।

पौराणिक-कथा

रावण ने शिव की कठोर-तपस्या की।

शिव ने ज्योतिर्लिङ्ग दिया लंका ले-जाने हेतु।

शर्त: मार्ग में भूमि पर न रखें।

मार्ग में रावण ने ब्राह्मण (विष्णु-छद्म) को लिङ्ग दिया।

ब्राह्मण ने भूमि पर रखा। लिङ्ग वहीं स्थापित।

देवघर का अर्थ: देवों का घर।

श्रावणी-मेला

श्रावण-माह (जुलाई-अगस्त): विश्व का सबसे-बड़ा मेला।

सुल्तानगंज (बिहार) से देवघर तक 105 किमी पैदल कांवड़-यात्रा।

40+ लाख कांवड़िये।

पीला-वस्त्र पहने।

गंगा-जल लेकर आते।

सोमवार-विशेष।

दर्शन

सुबह 4:00 — दोपहर 3:30।

सायं 6:00 — रात्रि 10:00।

सर्व-दर्शन: निःशुल्क।

VIP-दर्शन: ₹500।

अभिषेक-बुकिंग।

सावन में 24-घण्टे खुला।

पहुँच

नज़दीकी रेलवे: जसीडीह (8 किमी)।

हवाई: देवघर हवाई-अड्डा (10 किमी)।

कोलकाता: 380 किमी।

पटना: 280 किमी।

सड़क-मार्ग सरल।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रावणी-मेला कब जायें?

श्रावण-सोमवार सर्वाधिक-शुभ। 2026 में सावन: 21 जुलाई — 19 अगस्त। भीड़-शिखर सोमवार।

कांवड़-यात्रा का अर्थ?

भक्त सुल्तानगंज से गंगाजल लाते। 105 किमी पैदल। शिव को अर्पण। मनोकामना-पूर्ति।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।