शृंगेरी-मठ — आदि-शंकराचार्य द्वारा 8वीं सदी में स्थापित 4 चार-मठों में दक्षिण-मठ। कर्नाटक की तुंगा-नदी पर।
शारदा-पीठम् भी कहलाता। माँ शारदा (सरस्वती) की मूल-प्रतिमा। प्रथम-शंकराचार्य: सुरेश्वराचार्य।
✦ 4 शंकराचार्य-मठ
1. **शृंगेरी** (दक्षिण): सामवेद। यजुर्वेद (शाखा)।
2. **द्वारका** (पश्चिम): सामवेद।
3. **पुरी** (पूर्व): ऋग्वेद।
4. **ज्योतिर्मठ** (उत्तर, बद्रीनाथ): अथर्ववेद।
✦ शृंगेरी की विशेषताएँ
शारदा-मन्दिर: देवी सरस्वती।
विद्याशंकर-मन्दिर: 12 राशि-स्तम्भ। सूर्य-गति-दर्शन।
तुंगा-नदी (केवल यहाँ बाएँ-पश्चिम बहती)।
मगरमच्छ-तालाब।
गुरु-निवास-विद्यापीठ।
✦ दर्शन और कार्यक्रम
सुबह 6:30 — दोपहर 2:00।
दोपहर 4:00 — रात्रि 9:00।
दैनिक-पूजा।
चातुर्मास्य: जुलाई-नवम्बर। शंकराचार्य उपस्थित।
नवरात्रि: विशेष-समारोह।
गुरु-पूर्णिमा।
✦ पहुँच
नज़दीकी हवाई: मंगलूर (105 किमी)।
नज़दीकी रेलवे: शिमोगा (95 किमी)।
बेंगलूरु: 330 किमी।
चिकमगलूर: 95 किमी।
पश्चिमी-घाट के मनोरम-दृश्य।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शंकराचार्य-दर्शन कैसे?▼
चातुर्मास्य (जुलाई-नवम्बर) सर्वोत्तम। प्रति-दिन सायं-दर्शन। आशीर्वाद के लिए लाइन।
4-मठ-यात्रा क्रम?▼
जोशी-मठ → शृंगेरी → द्वारका → पुरी। या उत्तर से दक्षिण। एक-वर्ष में सम्पूर्ण-यात्रा।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।