चार-वेद — हिन्दू-धर्म के मूल-शास्त्र। 1500-500 ईसा-पूर्व रचित। ऋग्वेद विश्व का सबसे-पुराना धार्मिक-ग्रन्थ।
चार-वेद: ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद। प्रत्येक के 4-भाग: संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद्।
✦ 1. ऋग्वेद
सबसे-पुराना (~1500 ईसा-पूर्व)।
10 मण्डल, 1028 सूक्त, 10,552 मन्त्र।
देवता-स्तुति: इन्द्र, अग्नि, सोम, सूर्य।
गायत्री-मन्त्र: 3.62.10।
नासदीय-सूक्त: सृष्टि-रहस्य।
UNESCO विश्व-धरोहर।
✦ 2. यजुर्वेद
यज्ञ-विधि-ग्रन्थ।
दो-शाखाएँ: कृष्ण-यजुर्वेद, शुक्ल-यजुर्वेद।
40 अध्याय, ~1975 मन्त्र।
महामृत्युञ्जय-मन्त्र (कृष्ण-य. 3.60)।
पुरुष-सूक्त।
गद्य + पद्य मिश्रित।
✦ 3. सामवेद
संगीत-वेद। मन्त्रों का गायन-स्वर।
1875 मन्त्र (अधिकांश ऋग्वेद से)।
भारतीय-शास्त्रीय-संगीत का स्रोत।
7 स्वर: सा रे ग म प ध नि।
उद्गाता-पुरोहित गायन।
✦ 4. अथर्ववेद
सामान्य-जीवन-वेद। चिकित्सा, गृह-व्यवहार, राजनीति, मन्त्र।
20 काण्ड, 6000 मन्त्र।
आयुर्वेद का स्रोत।
तन्त्र-मन्त्र-यन्त्र।
भारतीय-संविधान-राष्ट्रीय-वाक्य "सत्यमेव जयते" मुण्डक से।
✦ 4 भाग-संरचना
संहिता: मूल-मन्त्र।
ब्राह्मण: यज्ञ-विधि-व्याख्या।
आरण्यक: वन-में-अध्ययन-योग्य।
उपनिषद्: दर्शन-वेदान्त।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वेद किसने लिखे?▼
अपौरुषेय (मानव-रचित नहीं) — ऋषियों ने ध्यान में "देखे"। वेदव्यास ने 4 भागों में संकलित।
वेद-अध्ययन कैसे?▼
मूल-संस्कृत कठिन। अनुवाद: स्वामी दयानन्द, स्वामी विवेकानन्द, गीता-प्रेस। ऑनलाइन: vedicheritage.gov.in (निःशुल्क)।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।