गोत्र और प्रवर

सप्तर्षि-वंश-परम्परा — विवाह और संकल्प में अनिवार्य

मूल-गोत्र

8

सपिण्ड (पिता)

7 पीढ़ी

सपिण्ड (माता)

5 पीढ़ी

गोत्र — पैतृक-वंश-परम्परा। प्रत्येक हिन्दू एक-गोत्र से। मूल-7 ऋषियों (सप्तर्षि) के वंशज: कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि, वशिष्ठ। 8वाँ अगस्त्य।

विवाह-मिलान, श्राद्ध, संकल्प में अनिवार्य।

गोत्र क्या है

"गोत्र" = ऋषि-वंश। पुरुष-रेखा में चलता।

पुत्री विवाह-पश्चात पति-गोत्र अपनाती।

दत्तक: नया-पिता का गोत्र।

विवाह में गोत्र-नियम

सगोत्र-विवाह वर्जित (समान-गोत्र)।

मामा-गोत्र भी छोड़ें (कुछ-समाज)।

3-पीढ़ी-निकटता त्याग।

सपिण्ड-निषेध: 7-पीढ़ी पिता-रेखा, 5-पीढ़ी माता-रेखा।

दक्षिण-भारत में मामा-भाँजी-विवाह सामान्य।

प्रवर

प्रवर = गोत्र के विशिष्ट-पूर्वज (3-5 ऋषि)।

उदाहरण: भारद्वाज-गोत्र का प्रवर — आंगिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज।

संकल्प में पिता-नाम-गोत्र-प्रवर बोलना।

गोत्र कैसे जानें

पिता/दादा से पूछें।

कुल-पुरोहित।

गाँव-मन्दिर-पंजी।

यदि भूल गये: कश्यप-गोत्र मान सकते।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सगोत्र-विवाह क्यों वर्जित?

आनुवंशिक: निकट-रक्त-सम्बन्ध से बच्चे में रोग-जोखिम।

विदेशी से विवाह?

गोत्र-नियम लागू नहीं। कुछ-शास्त्र संस्कार-पश्चात "वसिष्ठ-गोत्र" मानते।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।