श्री अरविन्द

पूर्ण-योग के प्रवर्तक — पॉण्डिचेरी-आश्रम

जन्म

15 अगस्त 1872

समाधि

1950

मुख्य-कार्य

सावित्री

श्री अरविन्द — 1872-1950। आधुनिक-योग-दर्शन के क्रान्तिकारी। पूर्ण-योग (इन्टीग्रल योग)। पॉण्डिचेरी-आश्रम-संस्थापक।

कैम्ब्रिज-शिक्षित। स्वतन्त्रता-सेनानी से योगी। श्री-माँ (मीरा अल्फासा) सहयोगी।

जीवन-संक्षेप

जन्म: 15 अगस्त 1872, कोलकाता।

7 आयु: इंग्लैंड।

कैम्ब्रिज-स्नातक।

बड़ौदा कॉलेज-प्रोफेसर।

स्वतन्त्रता-संग्राम (1905-1910)।

अलीपुर-जेल (1908): आध्यात्मिक-दर्शन।

पॉण्डिचेरी-आगमन (1910)।

40 वर्ष आश्रम।

देहत्याग: 5 दिसम्बर 1950।

पूर्ण-योग (इन्टीग्रल योग)

कर्म + भक्ति + ज्ञान + राज-योग एकीकरण।

सब-जीवन योग।

सुप्रामेन्टल चेतना।

दिव्य-शरीर-परिवर्तन।

पृथ्वी पर दिव्य-जीवन।

मन्त्र-निरपेक्ष।

गुरु-शिष्य-व्यक्तिगत-योग नहीं।

मुख्य-कार्य

सावित्री: 24,000-पंक्ति महाकाव्य।

दिव्य-जीवन (Life Divine)।

योग-समन्वय।

गीता-व्याख्या।

उपनिषद्-व्याख्या।

भारत-नवजागरण।

30 खण्ड पूर्ण-वाणी।

पॉण्डिचेरी आश्रम और ऑरोविले

श्री अरविन्द-आश्रम: 1926 स्थापना।

5000+ निवासी।

कोई-सदस्यता-शुल्क नहीं।

आजीवन-सेवा।

ऑरोविले: 1968 स्थापना।

अंतर्राष्ट्रीय-शहर।

मनुष्य-एकता-प्रयोग।

श्री-माँ का स्वप्न।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रामेन्टल क्या?

मन से ऊपर का स्तर। पूर्ण-सत्य-चेतना। श्री अरविन्द ने प्रथम-वर्णन। दिव्य-जीवन का आधार।

15 अगस्त-संयोग?

भारत-स्वतन्त्रता-दिवस = श्री अरविन्द-जन्म-दिवस। उन्होंने इसे "दैवी-संयोग" कहा।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।