पतंजलि योग-सूत्र

योग-दर्शन का मूल-ग्रन्थ — 196 सूत्र

सूत्र

196

पाद

4

रचना

~200 ईपू

पतंजलि-योग-सूत्र — योग-दर्शन का मूल-ग्रन्थ। महर्षि पतंजलि-रचित (~200 ईसा-पूर्व)। 196 सूत्र, 4 पाद।

योग का परिभाषा: "योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः" — मन की वृत्तियों का निरोध = योग।

4 पाद (अध्याय)

1. **समाधि-पाद** (51 सूत्र): योग-परिभाषा, चित्त-वृत्ति, समाधि-प्रकार।

2. **साधन-पाद** (55 सूत्र): क्रिया-योग, क्लेश, अष्टांग-योग।

3. **विभूति-पाद** (56 सूत्र): धारणा-ध्यान-समाधि (संयम), सिद्धियाँ।

4. **कैवल्य-पाद** (34 सूत्र): मुक्ति, प्रकृति-पुरुष, कैवल्य।

5 चित्त-वृत्तियाँ

1. प्रमाण: सही-ज्ञान।

2. विपर्यय: गलत-ज्ञान।

3. विकल्प: कल्पना।

4. निद्रा: नींद।

5. स्मृति: स्मरण।

सब-निरोध = योग।

5 क्लेश

1. अविद्या: अज्ञान।

2. अस्मिता: अहंकार।

3. राग: आसक्ति।

4. द्वेष: घृणा।

5. अभिनिवेश: मृत्यु-भय।

क्लेश-नाश = कैवल्य।

अष्ट-सिद्धियाँ

1. अणिमा: सूक्ष्म-रूप।

2. महिमा: विशाल-रूप।

3. लघिमा: हल्का-शरीर।

4. गरिमा: भारी-शरीर।

5. प्राप्ति: सब-कुछ-प्राप्त।

6. प्राकाम्य: इच्छा-पूर्ति।

7. ईशित्व: शासन।

8. वशित्व: प्रकृति-नियन्त्रण।

सिद्धियाँ बन्धन — मोक्ष नहीं।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पतंजलि कौन?

महर्षि पतंजलि — 4 ग्रन्थ-कर्ता: योग-सूत्र, महाभाष्य (व्याकरण), चिकित्सा-शास्त्र, चरक-संहिता-संशोधक। ~200 ईसा-पूर्व।

अध्ययन-कैसे?

स्वामी विवेकानन्द-राज-योग, स्वामी सच्चिदानन्द-व्याख्या, स्वामी हरिहरानन्द-गीता-प्रेस। मूल-संस्कृत कठिन।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।