समाधि — योग का 8वाँ और अन्तिम-अंग। ध्यान की पूर्णता। ध्याता-ध्यान-ध्येय एक हो जाते। पतंजलि-योगसूत्र-वर्णित।
समाधि = "सम" (पूर्ण) + "आधि" (एकाग्रता)। आत्म-साक्षात्कार का द्वार।
✦ 2 मुख्य-प्रकार
1. **सम्प्रज्ञात-समाधि (सबीज)**: विषय-सहित। 4 स्तर।
2. **असम्प्रज्ञात-समाधि (निर्बीज)**: विषय-रहित। शुद्ध-चेतना।
✦ सम्प्रज्ञात के 4 स्तर
1. **सवितर्क**: स्थूल-वस्तु पर। तर्क-विचार-सहित।
2. **सविचार**: सूक्ष्म-तत्त्व पर। विवेक-सहित।
3. **सानन्द**: आनन्द-अनुभव। अहंकार-शेष।
4. **सास्मित**: मात्र "मैं"-भाव। शुद्ध-अहंकार।
✦ असम्प्रज्ञात के 2 प्रकार
**विदेह-मुक्ति**: देहत्याग-पश्चात।
**जीवन-मुक्ति**: जीवित-समाधि। शरीर-धारण-करते भी मुक्त।
✦ समाधि-संकेत
श्वास अति-धीमा (1-2/मिनट)।
हृदय-गति 30-40।
कोई बाहरी-संवेदना नहीं।
समय-बोध-समाप्त।
दिव्य-आनन्द।
चेहरे पर तेज।
योग-शक्तियाँ (सिद्धि) — किन्तु बन्धन।
✦ समाधि-तक का मार्ग
8-अंग योग पालन।
यम-नियम पहले।
आसन-प्राणायाम मध्यम।
प्रत्याहार-धारणा-ध्यान।
गुरु-कृपा अनिवार्य।
समय: वर्षों-दशकों।
कुछ साधक मात्र-गुरु-कृपा से तत्काल।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या मरण = समाधि?▼
नहीं। मरण मात्र देह-त्याग। समाधि चेतना का परम-अवस्था। महायोगी सशरीर समाधि।
समाधि-स्थल क्या?▼
सिद्ध-गुरुओं के देह-त्याग-स्थल। शिव-पार्वती-समाधि कैलाश। श्री रामकृष्ण-दक्षिणेश्वर। सुरक्षित-स्थल।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।