कुण्डलिनी शक्ति

मूलाधार-चक्र में सुषुप्त-दिव्य-ऊर्जा

लपेट

3.5

चक्र

7

लक्ष्य

सहस्रार

कुण्डलिनी-शक्ति — मूलाधार-चक्र (रीढ़ का आधार) में सुषुप्त-दिव्य-ऊर्जा। 3.5 लपेट सर्प-समान। योग-साधना से जागृत होती।

जागृति-पश्चात 7 चक्रों से उठती। सहस्रार में शिव-मिलन = समाधि = आत्म-साक्षात्कार।

7 चक्र

1. **मूलाधार** (रीढ़-आधार): अस्तित्व, सुरक्षा। 4 दल, लाल।

2. **स्वाधिष्ठान** (नाभि से नीचे): रचनात्मकता, यौन-ऊर्जा। 6 दल, नारंगी।

3. **मणिपूर** (नाभि): शक्ति, आत्म-विश्वास। 10 दल, पीला।

4. **अनाहत** (हृदय): प्रेम, करुणा। 12 दल, हरा।

5. **विशुद्ध** (कण्ठ): अभिव्यक्ति, सत्य। 16 दल, नीला।

6. **आज्ञा** (भौंहों के बीच): अन्तर्ज्ञान, ज्ञान। 2 दल, इण्डिगो।

7. **सहस्रार** (शिर-शीर्ष): समाधि, परम-चेतना। 1000 दल, बैंगनी/श्वेत।

जागरण-विधियाँ

**हठ-योग**: आसन, प्राणायाम (विशेषतः कपालभाति, भस्त्रिका)।

**मन्त्र-योग**: बीज-मन्त्र (लं-वं-रं-यं-हं-ओं)।

**ध्यान**: चक्र-विशेष-ध्यान।

**भक्ति-योग**: नाम-संकीर्तन, जप।

**तन्त्र**: गुरु-दीक्षा अनिवार्य।

**शक्तिपात**: सिद्ध-गुरु से ऊर्जा-संचार।

जागरण-संकेत

रीढ़ में गर्मी/ठण्डक।

कम्पन, झटके।

सहज-आनन्द।

तीव्र-अन्तर्ज्ञान।

भावनात्मक-उतार-चढ़ाव।

नींद-कमी (पर थकान-नहीं)।

दिव्य-दर्शन, संकेत।

सावधानी

गुरु-बिना खतरनाक — मानसिक-असन्तुलन का जोखिम।

तीव्र-जागरण से कुण्डलिनी-संकट (psycho-spiritual emergency)।

हठ से न-करें — स्वतः-समय-पर।

सात्विक-आहार, ब्रह्मचर्य अति-महत्वपूर्ण।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुण्डलिनी जागरण में कितना समय?

व्यक्ति-निर्भर। कुछ साधक: कुछ-वर्ष। कुछ: जीवन-भर। शक्तिपात से तत्काल अनुभव सम्भव।

योग-गुरु कैसे चुनें?

सिद्ध-परम्परा, जीवित-शिष्यों के परिणाम, स्वयं-शान्त-व्यक्तित्व, धन-न-माँगे, चमत्कार-प्रचार-नहीं।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।