पंचकर्म

आयुर्वेद का शुद्धिकरण-चिकित्सा — 5 कर्म

कर्म

5

अवधि

21-30 दिन

स्रोत

चरक-संहिता

पंचकर्म — आयुर्वेद का सर्वश्रेष्ठ-शुद्धिकरण-चिकित्सा। 5-कर्म से शरीर के दोष (वात-पित्त-कफ) सन्तुलित।

चरक-संहिता-वर्णित। आधुनिक: तनाव, मोटापा, चर्म-रोग, गठिया, अनिद्रा में अत्यन्त-प्रभावी।

5 कर्म

1. **वमन** (नियन्त्रित-उल्टी): कफ-दोष के लिए। औषधीय-दूध से।

2. **विरेचन** (दस्त): पित्त-दोष के लिए। औषधीय-काढ़ा।

3. **बस्ति** (एनिमा): वात-दोष के लिए। औषधीय-तेल/काढ़ा।

4. **नस्य** (नाक-मार्ग): सिर के रोगों के लिए। औषधीय-तेल नाक में।

5. **रक्त-मोक्षण** (रक्त-शुद्धि): पुराने त्वचा-रोगों के लिए। जोंक या सुई।

पंचकर्म-प्रक्रिया

**पूर्व-कर्म** (5-7 दिन): स्नेहन (तेल-मालिश) + स्वेदन (भाप)।

**प्रधान-कर्म** (1-3 दिन): ऊपर-वर्णित 5 में से एक/अधिक।

**पश्चात्-कर्म** (7-14 दिन): आहार-नियम, धीमा-पुनर्वास, औषधि।

कुल: 21-30 दिन।

कौन ले

तनाव, चिन्ता, अवसाद।

मोटापा, मधुमेह।

गठिया, संधि-शोथ।

चर्म-रोग, सोरायसिस।

माइग्रेन।

अनिद्रा।

पुरानी-थकान।

दीर्घकालिक-पाचन-समस्या।

कौन-न-ले

गर्भवती, स्तनपान।

मासिक-धर्म-चलते।

तीव्र-संक्रमण।

गम्भीर-रोग।

12 वर्ष से छोटे, 70+ बुजुर्ग।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचकर्म कितना खर्च?

सरकारी-केन्द्र: ₹5,000-15,000। प्रसिद्ध-स्थान (केरल आर्य-वैद्य-शाला, AVT, सोमातीरम्): ₹50,000-2 लाख।

सभी 5 कर्म एक-साथ?

नहीं। शरीर-दोष-अनुसार 1-3। वैद्य-निर्धारित। स्व-निर्णय हानिकारक।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।