अष्टांग-योग — पतंजलि-योगसूत्र-वर्णित 8-अंग-योग। योग-दर्शन का मूल। आत्म-साक्षात्कार का मार्ग।
8 अंग: यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि। क्रमशः बाह्य से आन्तरिक।
✦ 8 अंग
1. **यम**: सामाजिक-संयम (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह)।
2. **नियम**: व्यक्तिगत-संयम (शौच, सन्तोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर-प्रणिधान)।
3. **आसन**: स्थिर-शरीर-स्थिति।
4. **प्राणायाम**: श्वास-नियन्त्रण।
5. **प्रत्याहार**: इन्द्रिय-नियन्त्रण।
6. **धारणा**: एक-स्थान पर मन-केन्द्रण।
7. **ध्यान**: अखण्ड-चेतना-प्रवाह।
8. **समाधि**: ध्याता-ध्यान-ध्येय एक।
✦ 5 यम (विस्तार)
**अहिंसा**: किसी को न-दुख। मनसा-वाचा-कर्मणा।
**सत्य**: यथार्थ-वाणी।
**अस्तेय**: न-चोरी। दूसरे का न लें।
**ब्रह्मचर्य**: इन्द्रिय-संयम।
**अपरिग्रह**: संग्रह-त्याग।
✦ 5 नियम
**शौच**: बाह्य-आन्तरिक शुद्धि।
**सन्तोष**: जो मिले उसमें-सुख।
**तप**: कठिनाई-सहन।
**स्वाध्याय**: शास्त्र-अध्ययन + आत्म-निरीक्षण।
**ईश्वर-प्रणिधान**: ईश्वर-समर्पण।
✦ अभ्यास-क्रम
यम-नियम पहले: 6 माह।
फिर आसन: 1 वर्ष।
फिर प्राणायाम: 1 वर्ष।
क्रम-छोड़ना खतरनाक।
गुरु-मार्गदर्शन अनिवार्य उच्च-अंगों में।
समाधि = वर्षों-दशकों।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अष्टांग योग और पावर-योग एक?▼
नहीं। आधुनिक "अष्टांग-योग" (पट्टाभि-जोइस) = आसन-केन्द्रित। पतंजलि का अष्टांग = 8-अंग-समग्र।
घर पर कैसे शुरू?▼
यम-नियम पहले। फिर सरल-आसन (सूर्य-नमस्कार)। फिर प्राणायाम (अनुलोम-विलोम)। फिर ध्यान।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।