कपालभाति प्राणायाम

हठ-योग की 6 शुद्धि-क्रियाओं में मस्तक-तेज-वर्धक

राउण्ड

3

श्वास/मि

60-120

दैनिक

5-10 मिनट

कपालभाति प्राणायाम — हठ-योग की 6 शुद्धि-क्रियाओं में एक। "कपाल" (मस्तक) + "भाति" (तेज) = मस्तक-तेज-वर्धक।

तीव्र-निःश्वास + निष्क्रिय-श्वास। पाचन, चयापचय, मस्तिष्क-स्पष्टता के लिए सर्व-श्रेष्ठ।

विधि

सुखासन या वज्रासन।

मेरुदण्ड-सीधा।

हाथ ज्ञान-मुद्रा में।

नाक से तीव्र-निःश्वास (पेट अन्दर)।

श्वास-स्वतः बाहर (निष्क्रिय)।

गति: 60-120 श्वास/मिनट।

3 राउण्ड: 30 → 60 → 100 श्वास।

बीच में 30 सेकेण्ड विश्राम।

7 लाभ

पाचन-सुधार।

फेफड़े-शुद्ध।

चयापचय-वृद्धि।

वजन-कमी।

मस्तिष्क-स्पष्टता।

पेट-कम।

साइनस-राहत।

सावधानी (कौन-न-करे)

उच्च-रक्त-चाप।

हृदय-रोग।

गर्भवती-स्त्रियाँ।

मासिक-धर्म।

हर्निया।

पेट-सर्जरी-पश्चात।

चक्कर-आना।

मिर्गी।

श्रेष्ठ-समय

ब्रह्म-मुहूर्त (4-6 AM)।

खाली-पेट।

प्राणायाम-क्रम: कपालभाति → अनुलोम-विलोम → भस्त्रिका → भ्रामरी।

दैनिक 5-10 मिनट।

गुरु-निर्देश पहले।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कपालभाति और भस्त्रिका में अन्तर?

कपालभाति: तीव्र-निःश्वास, निष्क्रिय-श्वास। भस्त्रिका: तीव्र-दोनों। कपालभाति शान्त-कार्य।

दैनिक कितनी देर?

प्रारम्भ: 1 राउण्ड 30 श्वास। 1-2 सप्ताह में 3 राउण्ड 100 श्वास। अधिकतम 15 मिनट।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।