रामकृष्ण परमहंस

बंगाल के 19वीं-सदी के काली-भक्त-संत

जन्म

1836

समाधि

1886

शिष्य

विवेकानन्द

श्री रामकृष्ण परमहंस — बंगाल के 19वीं-सदी-संत। काली-भक्त। दक्षिणेश्वर-काली-मन्दिर के पुजारी। स्वामी विवेकानन्द के गुरु।

1836-1886। सब-धर्म एक-सत्य की ओर। हिन्दू-मुस्लिम-ईसाई सब साधना की।

जीवन-संक्षेप

जन्म: 18 फरवरी 1836, कमारपुकुर (बंगाल)।

मूल-नाम: गदाधर चट्टोपाध्याय।

पिता: खुदीराम। माँ: चन्द्रमणि।

7 आयु: समाधि-अनुभव।

20 आयु: दक्षिणेश्वर-पुजारी।

सारदा-देवी से विवाह (8 आयु में, ब्रह्मचर्य रखा)।

तोतापुरी से अद्वैत-दीक्षा।

कैंसर से देहत्याग: 16 अगस्त 1886।

सब-धर्म-साधना

तान्त्रिक-साधना (भैरवी ब्राह्मणी)।

वैष्णव-भक्ति।

अद्वैत (तोतापुरी)।

सूफी-इस्लाम।

ईसाई।

सब में ईश्वर-दर्शन।

"जतो मत, ततो पथ" (जितने मत, उतने मार्ग)।

मुख्य-शिक्षाएँ

ईश्वर-दर्शन सम्भव।

भक्ति श्रेष्ठ-मार्ग।

काम-कांचन त्याग।

गुरु-कृपा अनिवार्य।

धर्म-समभाव।

सेवा-नर-नारायण।

दर्शन-भोजन के लिए नहीं।

विरासत

विवेकानन्द ने रामकृष्ण-मिशन-स्थापित (1897)।

देश-विदेश में 200+ केन्द्र।

बेलूड़-मठ: मुख्यालय।

रामकृष्ण-कथामृत (महेन्द्र गुप्त-लिखित): वार्तालाप।

दक्षिणेश्वर-मन्दिर: तीर्थ।

कथामृत 5-खण्ड हिन्दी-अनुवाद उपलब्ध।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दक्षिणेश्वर कहाँ?

कोलकाता से 16 किमी। हुगली-तट पर। काली-मन्दिर + रामकृष्ण-कक्ष।

सारदा-देवी की भूमिका?

रामकृष्ण की पत्नी और शक्ति। उनके बाद माँ-संत। रामकृष्ण-मिशन में मातृ-स्वरूप पूजी।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।