षोडश-संस्कार — हिन्दू-धर्म के 16 जीवन-संस्कार। गर्भाधान से अन्त्येष्टि तक। मनुस्मृति, गृह्यसूत्र-वर्णित।
✦ गर्भ और जन्म-पूर्व
1. गर्भाधान — सन्तान-संकल्प।
2. पुंसवन — गर्भ-तीसरे महीने।
3. सीमन्तोन्नयन — गर्भ-7-8वाँ महीना।
✦ बाल्य-काल
4. जातकर्म — जन्म-पश्चात।
5. नामकरण — 11वाँ या 12वाँ दिन।
6. निष्क्रमण — 4वाँ माह।
7. अन्नप्राशन — 6वाँ माह।
8. चूड़ाकरण/मुण्डन — 1-3 वर्ष।
9. कर्णवेधन — 6-12 माह।
✦ विद्या
10. विद्यारम्भ — 5 वर्ष।
11. उपनयन/यज्ञोपवीत — 8 (ब्राह्मण), 11 (क्षत्रिय), 12 (वैश्य)।
12. वेदारम्भ।
✦ गृहस्थ और अन्तिम
13. समावर्तन — गुरुकुल-समाप्ति।
14. विवाह।
15. वानप्रस्थ — 50+ आयु।
16. अन्त्येष्टि — मृत्यु-संस्कार।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सब-संस्कार आज सम्भव?▼
13 (बाल्य-गृहस्थ) सामान्य आज। वानप्रस्थ अधिकांश छोड़ते। ऐतिहासिक-आदर्श।
सबसे महत्वपूर्ण?▼
विवाह + अन्त्येष्टि अनिवार्य। अन्य परिवार-परम्परा।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।