सरस्वती माता

सरस्वती माता

विद्या, संगीत, कला एवं वेद की देवी — ब्रह्मा-पत्नी

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सरस्वती माता परिचय

अन्य नाम / उपाधियाँ: वाणी, भारती, शारदा, हंसवाहिनी, वीणावादिनी, ब्रह्माणी, बाग्देवी

सरस्वती माता हिन्दू त्रिदेवी की तृतीय एवं विद्या, संगीत, कला, एवं वाक्-शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं। ब्रह्मा की पत्नी एवं वेदों की माता — "वेद-माता"। ऋग्वेद में सरस्वती नदी के रूप में पूजित एवं उसी से देवी रूप का विकास।

सरस्वती शुद्ध-ज्ञान का प्रतीक — जो अहंकार, क्रोध, मोह से रहित है। वे धन की देवी (लक्ष्मी) से भिन्न हैं — लक्ष्मी भौतिक समृद्धि देती हैं, सरस्वती बुद्धि देती हैं। ज्ञान-धन शाश्वत है, भौतिक धन क्षणिक।

वसन्त पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी) सरस्वती का परम-शुभ दिवस। इस दिन विद्यारम्भ संस्कार, पुस्तक-पूजन, वीणा-पूजन। नवरात्रि के तीसरे चरण में भी सरस्वती की उपासना। शिक्षण-संस्थान, पुस्तकालय, संगीत-शाला में उनकी स्थापना अति-शुभ।

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स्वरूप एवं चित्रण

श्वेत-वर्णा देवी — कुन्द-पुष्प, चन्द्र, हिम के समान। श्वेत वस्त्र-आभरण। चतुर्भुज — हाथों में वीणा (वर दण्ड), पुस्तक (वेद), अक्षमाला, एवं कमण्डलु। श्वेत कमल पर विराजमान, हंस वाहन। मुख पर मनोहर मुस्कान। मस्तक पर मुकुट, ललाट पर अर्ध-चन्द्र।

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परिवार एवं सम्बन्ध

पतिभगवान् ब्रह्मा
वाहनहंस (मराल) — कुछ रूपों में मोर
धामसत्य लोक (ब्रह्मा के साथ)
अधिष्ठानविद्या, वेद, संगीत, कला, वाक्
दिशापूर्व
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प्रमुख मन्त्र

ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः

Om Aim Saraswatyai Namah

अर्थ: सरस्वती देवी को नमस्कार। बीज-मन्त्र "ऐं" वाक्-शक्ति का।

या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणा वर दण्ड मण्डित करा या श्वेत पद्मासना।

Yaa Kundendu Tushara-Hara Dhavala Yaa Shubhra-Vastravrita · Yaa Veena Vara Danda Mandita Karaa Yaa Shvet Padmasana

अर्थ: जो कुन्द, चन्द्र, हिम के समान श्वेत — श्वेत वस्त्रों से सुसज्जित — वीणा एवं पुस्तक धारिणी — श्वेत कमल पर विराजमान — उन सरस्वती को नमन।

सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि। विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥

Saraswati Namastubhyam Varade Kamarupini · Vidyarambham Karishyami Siddhir-Bhavatu Me Sada

अर्थ: वर देने वाली, कामरूपिणी सरस्वती को नमन — विद्या आरम्भ कर रहा हूँ, सर्वदा सिद्धि हो।

दार्शनिक प्रतीक

श्वेत-वर्ण = निष्कलंक शुद्ध-ज्ञान। वीणा = सात स्वरों में सम्पूर्ण ब्रह्माण्डीय संगीत। पुस्तक = वेद-शास्त्र। अक्षमाला = निरन्तर मन्त्र-जप। कमण्डलु = ज्ञान का अमृत-कलश। हंस = विवेक — दूध एवं जल को पृथक् करने की क्षमता (नीर-क्षीर विवेक)। श्वेत कमल = शुद्ध मन। चार हाथ = मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार पर नियन्त्रण।