सरस्वती वन्दना

विद्या-ज्ञान-कला की देवी — छात्रों के लिए अनिवार्य

बीज-मन्त्र

ऐं

रंग

सफेद

प्रमुख-दिन

वसन्त-पंचमी

सरस्वती-वन्दना — विद्या-ज्ञान-कला की देवी की स्तुति। छात्रों, कलाकारों, संगीतकारों, लेखकों के लिए दैनिक-अनिवार्य।

प्रसिद्ध-वन्दना: "या कुन्देन्दु तुषारहार धवला" — पं. नरेन्द्र शर्मा रचित। स्कूलों में सर्व-गायन।

मुख्य-वन्दना

या कुन्देन्दु तुषार-हार-धवला, या शुभ्र-वस्त्रावृता।

या वीणा-वर-दण्ड-मण्डित-करा, या श्वेत-पद्मासना॥

या ब्रह्माच्युत-शंकर-प्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।

सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेष-जाड्यापहा॥

अन्य-मन्त्र

बीज-मन्त्र: "ॐ ऐं नमः"।

गायत्री-मन्त्र: "ॐ वाग्देव्यै च विद्महे, ब्रह्म-पत्न्यै च धीमहि, तन्नो वाणी प्रचोदयात्"।

मूल-मन्त्र: "ॐ श्री सरस्वत्यै नमः"।

जप-विधि

प्रातः 5-7 बजे। सफेद-वस्त्र।

सरस्वती-प्रतिमा/चित्र पूर्व-मुख।

सफेद-पुष्प (कमल/जूही)।

दीप, धूप, सफेद-चन्दन।

किताब/वीणा/संगीत-यन्त्र भी पूजें।

पीला-नैवेद्य (बूँदी, मीठा)।

परीक्षा-पूर्व 11/21/108 बार।

सर्वोत्तम-दिन

वसन्त-पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी) — सर्व-शक्तिशाली।

नवरात्रि के अष्टमी-नवमी।

गुरु-पूर्णिमा।

परीक्षा से पहले प्रत्येक-दिन।

छोटे-बच्चे का अक्षर-आरम्भ (विद्या-आरम्भ-संस्कार)।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परीक्षा से पहले कब करें?

14 दिन पूर्व आरम्भ। प्रातः 11 जप। परीक्षा-दिन 5 जप। पीला-वस्त्र पहनें।

सरस्वती-नदी कहाँ?

पौराणिक-नदी, अब लुप्त। हरियाणा-राजस्थान में सूखी-धारा। कुरुक्षेत्र-यमुनोत्री-संगम स्थल।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।