✦ सरस्वती यन्त्र ✦
✦ विद्या, संगीत एवं वाक्-शक्ति का यन्त्र ✦
✦ सरस्वती यन्त्र क्या है? ✦
सरस्वती यन्त्र — विद्या, संगीत, कला, वाक्-शक्ति की देवी श्री सरस्वती की कृपा का यन्त्र। ब्रह्मा की पत्नी एवं वेदों की माता के रूप में सरस्वती हिन्दू त्रिदेवी (लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती) में स्थान रखती हैं।
विद्यार्थी, शोधकर्त्ता, संगीतज्ञ, लेखक, वक्ता — सभी इस यन्त्र की उपासना से लाभान्वित होते हैं। बुद्धि की मन्दता, उच्चारण-दोष, स्मृति-क्षीणता, परीक्षा भय — इन सभी का निवारण।
वसन्त पंचमी सरस्वती का परम-शुभ दिवस। विद्यारम्भ संस्कार, पुस्तक-पूजन, वीणा-पूजा इस दिन की जाती है। यन्त्र की स्थापना अध्ययन कक्ष, पुस्तकालय, अथवा संगीत-शाला में करनी चाहिए।
✦ ज्यामितीय रचना ✦
केन्द्र में बिन्दु एवं "ऐं" बीज — षट्कोण (दो परस्पर त्रिकोण) — अष्ट-दल कमल — सोलह-दल कमल — चन्द्र-कला — भूपुर। मध्य में "वीणा-पुस्तक" प्रतीक अंकित। चार दिशाओं में चार वेदों का प्रतीक।
✦ अधिष्ठात्री देवता ✦
श्री सरस्वती — ब्रह्मा पत्नी, वेद-माता, विद्या-संगीत-कला की देवी। श्वेत-वस्त्रा, हंस-वाहिनी, वीणा-पुस्तक-धारिणी।
✦ मन्त्र ✦
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
Om Aim Saraswatyai Namah
अर्थ: सरस्वती देवी को नमन — विद्या एवं वाक्-शक्ति की देवी।
अनुशंसित जप: 108 बार
या कुन्देन्दु तुषार हार धवला या शुभ्र वस्त्रावृता। या वीणा वर दण्ड मण्डित करा या श्वेत पद्मासना।
Yaa Kundendu Tushara Hara Dhavala · Yaa Shubhra Vastravrita · Yaa Veena Vara Danda Mandita Kara · Yaa Shvet Padmasana
अर्थ: जो कुन्द-पुष्प, चन्द्र, हिम के समान श्वेत — श्वेत वस्त्रों से सुसज्जित — वीणा एवं पुस्तक धारिणी — श्वेत कमल पर विराजमान — उन सरस्वती को मेरा नमन।
✦ लाभ एवं फल ✦
✦ स्थापना नियम ✦
सामग्री
श्वेत स्फटिक (श्रेष्ठतम), रजत, अथवा भूर्ज पत्र पर श्वेत चन्दन से अंकित।
दिशा
अध्ययन कक्ष की पूर्व अथवा उत्तर-पूर्व दीवार। यन्त्र का मुख पूर्व। विद्यार्थी पूर्वाभिमुख होकर अध्ययन करें।
मुहूर्त
वसन्त पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी), नवरात्रि, गुरुवार प्रातः, गुरु पुष्य योग।