माया दर्शन

ब्रह्म को ढकने वाली भ्रम-शक्ति

शक्ति

2

गुण

3

नाश

ज्ञान

माया — हिन्दू-दर्शन में भ्रम/प्रकृति की शक्ति। ब्रह्म को ढकने वाली। अद्वैत-वेदान्त का मुख्य-विषय।

"मा" (नहीं) + "या" (जो है) = जो है ही नहीं। भौतिक-जगत = माया-निर्मित।

माया-स्वरूप

**अनादि**: कब-शुरू अज्ञात।

**सान्त**: ज्ञान-प्राप्ति पर समाप्त।

**अनिर्वचनीय**: न सत्य न असत्य।

**प्रकाश्य**: ब्रह्म-प्रकाश से भासमान।

3-गुण: सत्त्व, रजस्, तमस्।

दृश्य-जगत = माया-कृति।

माया के 2 कार्य

1. **आवरण-शक्ति**: ब्रह्म को ढकती।

2. **विक्षेप-शक्ति**: नाम-रूप-जगत प्रकट करती।

उदाहरण: रस्सी पर साँप-भ्रम।

रस्सी = ब्रह्म। साँप = जगत।

ज्ञान-प्रकाश = साँप-भ्रम-नाश।

अद्वैत-दृष्टि (शंकर)

ब्रह्म एक-सत्य।

जगत मिथ्या (व्यावहारिक-सत्य, परमार्थिक-असत्य)।

जीव = ब्रह्म + अविद्या।

अविद्या-नाश = मोक्ष।

तीन-स्तर-सत्य: प्रातिभासिक, व्यावहारिक, पारमार्थिक।

विशिष्टाद्वैत-दृष्टि (रामानुज)

माया = ईश्वर की शक्ति, भ्रम नहीं।

जगत वास्तविक।

जीव अंश-रूप।

भक्ति से ईश्वर-मिलन।

द्वैत-वेदान्त (माध्व): माया = प्रकृति।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माया भ्रम है तो दुःख वास्तविक?

व्यावहारिक-स्तर पर वास्तविक। पारमार्थिक-स्तर पर भ्रम। ज्ञान-स्थिति में दुःख-नाश।

माया से कैसे बचें?

ज्ञान-योग। गुरु-कृपा। ध्यान। सत्-संग। माया से बचना नहीं — माया-पार जाना।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।