माया — हिन्दू-दर्शन में भ्रम/प्रकृति की शक्ति। ब्रह्म को ढकने वाली। अद्वैत-वेदान्त का मुख्य-विषय।
"मा" (नहीं) + "या" (जो है) = जो है ही नहीं। भौतिक-जगत = माया-निर्मित।
✦ माया-स्वरूप
**अनादि**: कब-शुरू अज्ञात।
**सान्त**: ज्ञान-प्राप्ति पर समाप्त।
**अनिर्वचनीय**: न सत्य न असत्य।
**प्रकाश्य**: ब्रह्म-प्रकाश से भासमान।
3-गुण: सत्त्व, रजस्, तमस्।
दृश्य-जगत = माया-कृति।
✦ माया के 2 कार्य
1. **आवरण-शक्ति**: ब्रह्म को ढकती।
2. **विक्षेप-शक्ति**: नाम-रूप-जगत प्रकट करती।
उदाहरण: रस्सी पर साँप-भ्रम।
रस्सी = ब्रह्म। साँप = जगत।
ज्ञान-प्रकाश = साँप-भ्रम-नाश।
✦ अद्वैत-दृष्टि (शंकर)
ब्रह्म एक-सत्य।
जगत मिथ्या (व्यावहारिक-सत्य, परमार्थिक-असत्य)।
जीव = ब्रह्म + अविद्या।
अविद्या-नाश = मोक्ष।
तीन-स्तर-सत्य: प्रातिभासिक, व्यावहारिक, पारमार्थिक।
✦ विशिष्टाद्वैत-दृष्टि (रामानुज)
माया = ईश्वर की शक्ति, भ्रम नहीं।
जगत वास्तविक।
जीव अंश-रूप।
भक्ति से ईश्वर-मिलन।
द्वैत-वेदान्त (माध्व): माया = प्रकृति।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
माया भ्रम है तो दुःख वास्तविक?▼
व्यावहारिक-स्तर पर वास्तविक। पारमार्थिक-स्तर पर भ्रम। ज्ञान-स्थिति में दुःख-नाश।
माया से कैसे बचें?▼
ज्ञान-योग। गुरु-कृपा। ध्यान। सत्-संग। माया से बचना नहीं — माया-पार जाना।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।