आत्मा-परमात्मा — हिन्दू-दर्शन का मूल-तत्त्व। आत्मा = व्यक्तिगत-चेतना। परमात्मा = सर्वव्यापी-ब्रह्म। दोनों मूलतः एक।
उपनिषद्-वर्णित: "तत्त्वमसि" (तू वही है)। आत्म-साक्षात्कार = परमात्म-साक्षात्कार।
✦ आत्मा का स्वरूप
अमर: न जन्म न मृत्यु।
अविनाशी: शस्त्र-अग्नि-जल-वायु से अप्रभावित।
सूक्ष्मतम: आणविक से भी छोटी।
सर्वत्र: सब-जीवों में।
साक्षी: कर्म-साक्षी, कर्ता नहीं।
अनादि-अनन्त।
गीता 2.20-25 वर्णित।
✦ परमात्मा का स्वरूप
सर्वव्यापी: सब-जगह।
सर्वज्ञ: सब जानने वाला।
सर्वशक्तिमान्।
सब-कारणों का कारण।
गुणातीत: 3 गुणों से परे।
निर्गुण-निराकार + सगुण-साकार दोनों।
✦ आत्मा-परमात्मा-सम्बन्ध
**अद्वैत** (शंकर): एक ही। माया से भिन्न दिखती।
**विशिष्टाद्वैत** (रामानुज): एक किन्तु आत्मा परमात्मा का अंश।
**द्वैत** (माध्व): अलग। आत्मा सेवक, परमात्मा स्वामी।
**द्वैताद्वैत**: मध्यम-स्थिति।
सब वेदान्त-शाखाएँ।
✦ अनुभव-मार्ग
ध्यान-योग।
कर्म-योग।
भक्ति-योग।
ज्ञान-योग।
गुरु-कृपा।
समाधि-स्थिति।
जीवन-मुक्त: देह-धारण-करते मुक्त।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आत्मा कितनी?▼
अद्वैत: एक (माया-भेद)। द्वैत: अनन्त। विशिष्टाद्वैत: अनन्त किन्तु ब्रह्म से जुड़ी।
मरण-पश्चात आत्मा क्या?▼
गीता: नया शरीर। कर्म-अनुसार। मोक्ष = परमात्मा से एक।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।