ब्रह्म

हिन्दू-दर्शन का परम-तत्त्व — सच्चिदानन्द

स्वरूप

सच्चिदानन्द

प्रकार

निर्गुण-सगुण

महावाक्य

4

ब्रह्म — हिन्दू-दर्शन का परम-तत्त्व। निर्गुण, निराकार, अनन्त, सर्वव्यापी। उपनिषदों का मुख्य-विषय।

"ब्रह्म" का अर्थ: विशाल, विस्तृत। शब्द-मूल "बृह्" (बढ़ना)। 4 महावाक्यों का विषय।

ब्रह्म का स्वरूप

सत्-चित्-आनन्द (सच्चिदानन्द)।

सत्: नित्य-अस्तित्व।

चित्: चेतना।

आनन्द: परम-सुख।

निर्गुण: 3 गुणों से परे।

निराकार: रूप-रहित।

नेति-नेति: "यह नहीं, यह नहीं" — परिभाषा-असम्भव।

ब्रह्म-2-प्रकार

1. **निर्गुण-ब्रह्म**: रूप-गुण-रहित। उपनिषद्-वर्णित। ध्यान-योग्य।

2. **सगुण-ब्रह्म** (ईश्वर): रूप-सहित। पूजा-योग्य। विष्णु, शिव, देवी।

दोनों एक ही ब्रह्म के 2 आयाम।

भक्त सगुण से शुरू, निर्गुण में पहुँचे।

4 महावाक्य

1. **तत्त्वमसि** (छान्दोग्य): "तू वही है" — आत्मा = ब्रह्म।

2. **अहं ब्रह्मास्मि** (बृहदारण्यक): "मैं ब्रह्म हूँ"।

3. **प्रज्ञानं ब्रह्म** (ऐतरेय): "ज्ञान ही ब्रह्म"।

4. **अयमात्मा ब्रह्म** (माण्डूक्य): "यह आत्मा ब्रह्म है"।

चार-शंकराचार्य-मठों के मुख्य।

ब्रह्म-साक्षात्कार

ज्ञान-योग: श्रवण → मनन → निदिध्यासन।

3-चरण: श्रवण (सुनना), मनन (चिन्तन), निदिध्यासन (ध्यान)।

गुरु-शिष्य-परम्परा।

समाधि-अवस्था।

मोक्ष = ब्रह्म-स्थिति।

जीवन-मुक्त।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रह्म और भगवान-राम/कृष्ण?

सगुण-ब्रह्म = राम/कृष्ण/शिव। निर्गुण-ब्रह्म = परम-तत्त्व। एक ही दो-दृष्टिकोण।

ब्रह्म-अनुभव कैसे?

गहन-ध्यान, गुरु-कृपा, सद्गुणों का अभ्यास, सेवा-दान। अनेक-जन्मों का प्रयास सम्भव।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।