चार-पुरुषार्थ — हिन्दू-दर्शन के अनुसार जीवन के 4 लक्ष्य। धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष। सन्तुलित-जीवन का सूत्र।
क्रम महत्वपूर्ण: धर्म पहले, फिर धर्म-अनुसार अर्थ-काम। अन्ततः मोक्ष।
✦ 1. धर्म
कर्तव्य, नैतिकता, सत्य।
सब-पुरुषार्थों की नींव।
जाति-धर्म, आयु-धर्म, स्वधर्म।
सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह।
मनुस्मृति, गीता, धर्म-शास्त्र-वर्णित।
✦ 2. अर्थ
धन, सम्पत्ति, संसाधन।
धर्म-अनुसार-अर्जन।
अर्थ-शास्त्र (कौटिल्य)।
परिवार-निर्वाह, समाज-योगदान।
दान, यज्ञ हेतु धन आवश्यक।
धन-दुष्ट-कर्म-त्याज्य।
✦ 3. काम
इच्छा, सुख, सम्बन्ध।
धर्म-अनुसार-भोग।
गृहस्थ-आश्रम में मुख्य।
सन्तानोत्पत्ति।
कला, संगीत, सौन्दर्य।
काम-सूत्र (वात्स्यायन)।
अति-काम वर्जित।
✦ 4. मोक्ष
मुक्ति, परम-लक्ष्य।
जन्म-मरण-चक्र-मुक्ति।
आत्म-साक्षात्कार।
3 मार्ग: कर्म, भक्ति, ज्ञान।
सब-पुरुषार्थ का अन्तिम-फल।
धर्म-अर्थ-काम के सन्तुलन से।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सब 4 आज सम्भव?▼
हाँ। आधुनिक-जीवन में: धर्म (नैतिकता) + अर्थ (कैरियर) + काम (परिवार-शौक) + मोक्ष (आध्यात्मिकता)। सन्तुलन।
मोक्ष ही श्रेष्ठ?▼
अन्तिम-लक्ष्य। पर पहले 3 के बिना समय-पूर्व मोक्ष-इच्छा अधूरी। आश्रम-व्यवस्था इसी का प्रबन्ध।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।