अष्टावक्र-गीता — अद्वैत-वेदान्त का सर्व-प्रसिद्ध-संवाद। मुनि अष्टावक्र और राजा जनक के बीच। 20 अध्याय, 298 श्लोक।
भगवद्-गीता-समान महत्व। तत्काल-मुक्ति का संदेश। "तू पहले से ही मुक्त है — जान।"
✦ मुनि अष्टावक्र
पिता-गर्भ-वर्षा का शाप: 8-स्थानों पर वक्र-शरीर।
अष्ट + वक्र = अष्टावक्र।
12 आयु में जनक की राज-सभा में पण्डितों को हराया।
पिता को मुक्त किया।
अद्वैत-ब्रह्म-ज्ञानी।
✦ मुख्य-शिक्षाएँ
"मैं शुद्ध-चेतना हूँ। शरीर-मन से अलग।"
तू पहले से ही मुक्त।
जागरण की आवश्यकता।
कर्म-संन्यास नहीं — कर्म-में-संन्यासी।
सब-कर्म प्रकृति का।
मैं केवल साक्षी।
ध्यान-समाधि अनावश्यक — ज्ञान पर्याप्त।
✦ जनक का तत्काल-मुक्ति
राजा जनक 4-प्रश्न पूछे।
अष्टावक्र ने 4-उत्तर दिए।
उसी-क्षण जनक-समाधि-स्थिति।
तत्काल-मुक्ति का प्रमाण।
क्रमिक-साधना नहीं।
सीधा-ज्ञान।
✦ पाठ-विधि
नित्य 1-2 अध्याय।
7-दिन में सम्पूर्ण।
मनन-निदिध्यासन।
गुरु-संग सर्वोत्तम।
हिन्दी-अनुवाद: स्वामी रामसुख दास, स्वामी भोले बाबा।
अंग्रेजी: ओशो-व्याख्या प्रसिद्ध।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अष्टावक्र-गीता और भगवद्-गीता में अन्तर?▼
भगवद्-गीता: कर्म-भक्ति-ज्ञान-समन्वय। अष्टावक्र: शुद्ध-अद्वैत-ज्ञान। गीता-व्यापक, अष्टावक्र-केन्द्रित।
क्या तत्काल-मुक्ति सम्भव?▼
अष्टावक्र-दृष्टि: हाँ। पात्रता-आवश्यक। जनक-तुल्य पक्व-शिष्य चाहिए। आधुनिक-समय में दुर्लभ।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।