आज का शुभ मुहूर्त

आज के सब शुभ-समय: अभिजित-मुहूर्त (दोपहर का सर्वोत्तम-काल), ब्रह्म-मुहूर्त (साधना-काल), अमृत-कालिक मुहूर्त, शुभ चौघड़िया।

शुभ मुहूर्त — हिन्दू परम्परा में किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए सबसे अनुकूल समय का चयन। संस्कृत में "मुहूर्त" का अर्थ है समय का एक विशिष्ट क्षण, और "शुभ" का अर्थ मंगलकारी। शास्त्रों के अनुसार सम्पूर्ण दिन को 30 मुहूर्तों में बाँटा जाता है — प्रत्येक 48 मिनट का। प्रत्येक मुहूर्त का अपना अधिपति देवता एवं विशिष्ट प्रकृति होती है, जो उसे विशेष कार्यों के लिए अनुकूल या प्रतिकूल बनाती है।

भारतीय जीवन में शुभ मुहूर्त का स्थान विशेष है। विवाह, गृह प्रवेश, नवीन व्यवसाय आरम्भ, यात्रा, मुंडन, अन्नप्राशन, उपनयन — प्रत्येक संस्कार एवं महत्वपूर्ण कार्य के लिए मुहूर्त निर्धारण की परिपाटी सहस्राब्दियों पुरानी है। इस लेख में हम शुभ मुहूर्त के विभिन्न प्रकारों, निर्धारण पद्धतियों, एवं व्यावहारिक उपयोग का विस्तृत विवेचन करेंगे।

मुहूर्त की वैदिक अवधारणा

मुहूर्त की उत्पत्ति वैदिक काल से है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद — सभी में मुहूर्त का उल्लेख है। मुहूर्त चिन्तामणि (16वीं शताब्दी, राम दैवज्ञ रचित) मुहूर्त-शास्त्र का सबसे विस्तृत ग्रन्थ है। इसमें विवाह, यात्रा, गृह-निर्माण, राज्याभिषेक, युद्ध — सभी प्रकार के कार्यों के लिए मुहूर्त-नियम विस्तार से दिए गए हैं।

पारम्परिक रूप से शुभ मुहूर्त निर्धारण में पंचांग के पाँचों अंगों — तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार — का संयोजन देखा जाता है। इसके अतिरिक्त लग्न (rising sign), होरा (planetary hour), चंद्रबल (Moon strength), तारा बल (nakshatra strength), एवं ग्रहों की वर्तमान स्थिति का भी विश्लेषण किया जाता है।

दिन के 30 मुहूर्तों में 15 दिन के और 15 रात के होते हैं। इनमें से 8वाँ दिन-मुहूर्त "अभिजित" विशेष रूप से शुभ माना जाता है — दिन के मध्यान्ह पर 48 मिनट का यह काल किसी भी कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ है (बुधवार को छोड़कर)।

विभिन्न कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त: हिन्दू विवाह के लिए शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, या त्रयोदशी तिथि शुभ मानी जाती है। नक्षत्र में रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, और रेवती सर्वश्रेष्ठ हैं। माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ, मार्गशीर्ष — ये पाँच मास विवाह के लिए सर्वोत्तम। आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक — चातुर्मास की अवधि में विवाह वर्जित।

गृह प्रवेश मुहूर्त: नवनिर्मित घर में पहले प्रवेश हेतु शुक्ल पक्ष की पवित्र तिथि एवं पुष्य, हस्त, अनुराधा, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, या रेवती नक्षत्र शुभ है। माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ — ये चार मास गृह प्रवेश के लिए सर्वोत्तम। शुक्ल पक्ष में दक्षिणायन काल में भी प्रवेश अच्छा होता है यदि बृहस्पति बलवान हो।

व्यवसाय आरम्भ मुहूर्त: नया व्यापार, दुकान, अथवा कार्यालय खोलने हेतु बुधवार, गुरुवार, अथवा शुक्रवार सर्वोत्तम। पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल नक्षत्र अनुकूल। अमृत चौघड़िया, लाभ चौघड़िया अथवा शुभ चौघड़िया का विशेष महत्व। अक्षय तृतीया, धनतेरस, नवरात्रि — व्यापार आरम्भ के सर्वोत्तम पर्व।

वाहन क्रय मुहूर्त: नवीन वाहन के लिए शुक्रवार, गुरुवार, बुधवार, सोमवार शुभ। पुष्य, अश्विनी, रेवती, हस्त, चित्रा, अनुराधा, स्वाती नक्षत्र। अक्षय तृतीया, धनतेरस, नव-वर्ष — विशेष शुभ। मंगलवार और शनिवार वाहन क्रय हेतु वर्जित।

अभिजित मुहूर्त — दिन का सर्वश्रेष्ठ काल

अभिजित मुहूर्त दिन का 8वाँ मुहूर्त है — सौर मध्यान्ह के ठीक मध्य में 48 मिनट का काल। इसका नाम "अभिजित" इसलिए है क्योंकि इस समय कोई भी कार्य अवश्य "विजित" (विजय प्राप्त) करता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान राम का राज्याभिषेक अभिजित मुहूर्त में होने वाला था (कैकेयी के वरदान से पहले)।

अभिजित मुहूर्त की गणना सरल है: सूर्योदय और सूर्यास्त का मध्य निकालें — यह "मध्यान्ह" है। मध्यान्ह से 24 मिनट पूर्व अभिजित प्रारम्भ होता है, और 24 मिनट पश्चात् समाप्त होता है। दिल्ली में 28 अप्रैल 2026 को सूर्योदय 5:42 AM और सूर्यास्त 6:55 PM है — मध्यान्ह 12:18 PM, अभिजित 11:54 AM से 12:42 PM तक।

अभिजित का एकमात्र अपवाद बुधवार है — बुधवार को अभिजित शुभ नहीं माना जाता। मुहूर्त चिन्तामणि स्पष्ट रूप से इसे वर्जित करता है। हालांकि कुछ आधुनिक ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि बुधवार को भी अभिजित में सामान्य कार्य किए जा सकते हैं, परंतु विवाह जैसे विशेष संस्कार वर्जित रहने चाहिए।

अभिजित मुहूर्त के लिए विशेष शुभ कार्य: नये कार्य का आरम्भ, युद्ध एवं विजय यात्रा, राज्याभिषेक एवं उच्च पद ग्रहण, गृह प्रवेश एवं भूमि पूजन, महत्वपूर्ण समझौते एवं हस्ताक्षर, चुनाव लड़ना एवं साक्षात्कार, व्यापार आरम्भ एवं नवीन परियोजनाएँ, चिकित्सा एवं औषधि आरम्भ।

ब्रह्म मुहूर्त — आध्यात्मिक साधना का सर्वोत्तम काल

ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से 1 घंटा 36 मिनट पूर्व का काल है — दो मुहूर्त (96 मिनट) पहले। यह दिन का सबसे पवित्र एवं ऊर्जावान समय है। शास्त्रों में कहा गया है — "ब्राह्मे मुहूर्ते बुद्ध्येत धर्मार्थौ चानुचिन्तयेत्" — ब्रह्म मुहूर्त में जागकर धर्म और अर्थ का चिन्तन करें।

इस समय वातावरण में सात्विक ऊर्जा प्रचुर मात्रा में होती है। योग, ध्यान, प्राणायाम, मन्त्र-जाप, स्वाध्याय — सबके लिए सर्वोत्तम। योग शास्त्र में कहा गया है कि ब्रह्म मुहूर्त में किया गया एक घंटे का अभ्यास दिन के अन्य समय के दस घंटे के बराबर फल देता है।

दिल्ली में सूर्योदय 5:42 AM होने पर ब्रह्म मुहूर्त 4:06 AM से 5:42 AM तक होगा। ध्यान साधकों, यथा गायत्री महामन्त्र साधकों, के लिए यह सबसे शुभ काल है। कई पारम्परिक हिन्दू परिवारों में आज भी ब्रह्म मुहूर्त में जागने की परिपाटी है।

चौघड़िया — दैनिक मुहूर्त की सरल विधि

चौघड़िया एक त्वरित मुहूर्त-निर्धारण पद्धति है। दिन और रात्रि को 8-8 भागों में बाँटा जाता है — कुल 16 चौघड़िया। प्रत्येक चौघड़िया एक ग्रह से शासित होता है और शुभ या अशुभ माना जाता है।

सात प्रकार के चौघड़िया हैं — अमृत (चन्द्र, सर्वश्रेष्ठ), शुभ (गुरु, बहुत शुभ), लाभ (बुध, धन-कार्य हेतु), चर (शुक्र, यात्रा हेतु), रोग (मंगल, अशुभ), काल (शनि, अशुभ), उद्वेग (सूर्य, अशुभ)। शुभ कार्यों के लिए अमृत, शुभ, लाभ, अथवा चर चौघड़िया चुना जाता है।

चौघड़िया का दैनिक क्रम वार के स्वामी ग्रह से निर्धारित होता है। रविवार दिन का पहला चौघड़िया उद्वेग (सूर्य) से, सोमवार अमृत (चन्द्र) से, मंगलवार रोग (मंगल) से, इत्यादि। आठ चौघड़िया का क्रम: स्वामी → शनि → गुरु → मंगल → सूर्य → शुक्र → बुध → चन्द्र (फिर पुनरावृत्ति)।

📊कार्य-वार सर्वोत्तम मुहूर्त — पूर्ण तालिका

कार्यसर्वोत्तम-वारसर्वोत्तम-नक्षत्रचौघड़ियाविशेष-तिथि
विवाहसोम/बुध/गुरु/शुक्ररोहिणी, मृगशिरा, हस्त, अनुराधाअमृत/शुभअक्षय-तृतीया
गृह-प्रवेशसोम/बुध/गुरु/शुक्रपुष्य, हस्त, अनुराधा, उत्तर-फाल्गुनीशुभ/लाभअक्षय-तृतीया, धनतेरस
व्यापार-प्रारम्भबुध/गुरु/शुक्रपुष्य, हस्त, चित्रा, स्वातिअमृत/लाभदीपावली, धनतेरस
वाहन-क्रयसोम/बुध/गुरु/शुक्रपुष्य, अश्विनी, रेवती, हस्तशुभ/अमृतधनतेरस, अक्षय-तृतीया
नया-शिक्षा-प्रारम्भबुध/गुरुपुष्य, हस्त, श्रवण, रेवतीशुभबसन्त-पंचमी, गुरुपूर्णिमा
यात्रा (दीर्घ)सोम/बुध/शुक्रपुनर्वसु, स्वाति, श्रवण, अश्विनीचर/अमृतपूर्णिमा
मुण्डनसोम/बुध/गुरु/शुक्रमृगशिरा, पुष्य, हस्त, चित्राअमृत/शुभअक्षय-तृतीया
नामकरणसोम/बुध/गुरु/शुक्रअश्विनी, रोहिणी, पुष्य, हस्तशुभ/लाभ11वें-12वें दिन
आभूषण-क्रयगुरु/शुक्रपुष्य, हस्त, चित्रा, उत्तरा-फाल्गुनीअमृत/शुभधनतेरस, अक्षय-तृतीया

मंगलवार-शनिवार-रविवार अधिकांश शुभ-कार्यों के लिए वर्जित।

📊8 चौघड़िया — दैनिक शुभ-अशुभ क्रम

चौघड़ियास्वामी-ग्रहस्थितिश्रेष्ठ-कार्य
अमृतचन्द्रमा✓ सर्वोत्तम (★★★★★)विवाह, गृह-प्रवेश, सब शुभ-कार्य
शुभगुरु✓ श्रेष्ठ (★★★★)सब मांगलिक-कार्य, धार्मिक-कर्म
लाभबुध✓ शुभ (★★★)व्यापार, धन-कार्य, हस्ताक्षर
चरशुक्र✓ चर/यात्रा (★★★)यात्रा, कला, मनोरंजन
रोगमंगल✗ अशुभ (★)केवल सेना/शस्त्र-कार्य
कालशनि✗ अशुभ (★)केवल पितृ-कर्म, श्राद्ध
उद्वेगसूर्य✗ अशुभ (★)केवल सरकारी-नौकरी
अमृत-2 (दिन-2)चन्द्रमा✓ श्रेष्ठ (★★★★)सब शुभ-कार्य

📋किसी कार्य के लिए शुभ-मुहूर्त निकालने की 8-चरण विधि

  1. 1

    कार्य की प्रकृति निश्चित करें

    विवाह/गृह-प्रवेश/व्यापार/यात्रा/शिक्षा — प्रत्येक के अलग नियम। पहले स्पष्ट करें कि आप किस कार्य के लिए मुहूर्त चाहते हैं।

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    दिनांक-सीमा तय करें

    कार्य कब-तक करना है? 1 सप्ताह में, 1 माह में, 3 माह में? व्यापक-सीमा से अधिक-शुभ-विकल्प मिलेंगे।

  3. 3

    शुभ मास जाँचें

    चातुर्मास (25 जुलाई-20 नवम्बर 2026) में अधिकांश शुभ-कार्य वर्जित। पौष-मास (दिसम्बर-जनवरी) भी टालें।

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    शुभ-तिथि चुनें

    शुक्ल-पक्ष द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी श्रेष्ठ। चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या वर्जित।

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    शुभ-वार चुनें

    सोम, बुध, गुरु, शुक्र अधिकांश शुभ-कार्यों के लिए श्रेष्ठ। मंगल/शनि/रवि कुछ-विशेष-कार्यों के लिए ही।

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    शुभ-नक्षत्र की पुष्टि

    कार्य के अनुकूल नक्षत्र-वर्ग (मृदु, स्थिर, चर) चुनें। ऊपर तालिका से देखें। जातक के जन्म-नक्षत्र वर्जित।

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    चौघड़िया + अभिजित-मुहूर्त चुनें

    दिन के 8 चौघड़िया से अमृत/शुभ/लाभ/चर। यदि कुछ न मिले — अभिजित-मुहूर्त (दोपहर 11:50-12:38)।

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    राहु-काल/यमगण्ड/गुलिक टालें

    अंतिम-समय में सुनिश्चित करें कि चुना गया मुहूर्त राहु-काल, यमगण्ड, गुलिक-काल में नहीं पड़ता। ये दैनिक-अशुभ-काल।

⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें

  • "शुभ मुहूर्त" को magic-formula समझना

    क्यों: शुभ-मुहूर्त = अनुकूल-वातावरण। कर्म, परिश्रम, सही-निर्णय भी जरूरी। केवल मुहूर्त-शुभ हो — पर तैयारी न हो — सफलता नहीं।

    सही उपाय: मुहूर्त को "अच्छा-मौसम" समझें — बीज (कर्म-तैयारी) अच्छा हो तभी फसल। दोनों आवश्यक।

  • अपनी-कुण्डली के बिना सामान्य-शुभ-तिथि चुनना

    क्यों: सामान्य-शुभ-तिथि सब के लिए उपयुक्त नहीं। आपकी कुण्डली के मंगल/शनि-स्थिति, ताराबल अनुकूल नहीं हो — तो सामान्य-शुभ भी अशुभ बन जाता है।

    सही उपाय: सामान्य-शुभ-तिथियों की list से 5-10 विकल्प → फिर कुण्डली-अनुसार ज्योतिषी से final-selection।

  • अंतिम-समय पर राहु-काल/यमगण्ड में कार्य

    क्यों: दैनिक राहु-काल, यमगण्ड, गुलिक-काल — अशुभ। शुभ-तिथि-नक्षत्र होने पर भी इन समय में कार्य से असफलता-संकेत।

    सही उपाय: मुहूर्त-समय इन काल में नहीं पड़ना चाहिए। अभिजित-मुहूर्त (दोपहर 11:50-12:38) सर्व-दोष-निवारक।

  • बुधवार को अभिजित-मुहूर्त में विवाह

    क्यों: मुहूर्त-चिन्तामणि स्पष्ट: बुधवार को अभिजित-मुहूर्त नहीं देखा जाता। इसका शास्त्रीय-कारण — बुध-दिन और अभिजित-तत्त्व विरोधी।

    सही उपाय: बुधवार को अभिजित के बजाय अमृत/शुभ चौघड़िया चुनें। या बुधवार-छोड़कर अन्य-दिन।

  • पंचक/भद्रा/घनिष्ठा-पञ्चक में कार्य

    क्यों: विशेष-वर्जित-काल। पंचक में 5 कार्य वर्जित (छप्पर, ईंधन, बिस्तर, यात्रा-दक्षिण, शव)। भद्रा में मांगलिक-कार्य वर्जित।

    सही उपाय: पंचांग में पंचक/भद्रा-समय देखें। इन काल को छोड़कर मुहूर्त चुनें।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या शुभ मुहूर्त में किया कार्य निश्चित रूप से सफल होता है?

शुभ मुहूर्त सफलता की सम्भावना बढ़ाता है, परंतु पूर्ण गारंटी नहीं देता। कर्म, परिश्रम, और सही निर्णय भी आवश्यक हैं। मुहूर्त को एक "अनुकूल वातावरण" समझें — जैसे अच्छा मौसम बीज बोने के लिए। बीज स्वयं अच्छा हो और मेहनत हो तो ही फसल अच्छी होती है।

यदि शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं हो तो क्या करें?

अभिजित मुहूर्त लगभग प्रतिदिन उपलब्ध है (बुधवार को छोड़कर) — मध्यान्ह के आसपास 48 मिनट। यदि कोई और न हो, तो अमृत अथवा लाभ चौघड़िया का समय चुन सकते हैं। अंतिम विकल्प के रूप में, राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल, और भद्रा से बचें — शेष समय सामान्यतः उपयुक्त है।

क्या ऑनलाइन मुहूर्त कैलकुलेटर भरोसेमंद हैं?

हाँ, यदि वे शुद्ध खगोलीय गणना पर आधारित हों। हमारा कैलकुलेटर Jean Meeus algorithms + Lahiri Ayanamsa का उपयोग करता है — NASA-स्तर सटीकता। हालांकि महत्वपूर्ण कार्यों (विवाह, गृह प्रवेश) के लिए स्थानीय ज्योतिषाचार्य से भी परामर्श लेना उचित है क्योंकि वे आपकी कुंडली के व्यक्तिगत कारकों को भी समाहित करते हैं।

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सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।