यम-दीप-दान — धनतेरस/नरक-चतुर्दशी पर यमराज को दीप-अर्पण। अकाल-मृत्यु-निवारण। 2026 में यम-दीप 6 नवम्बर (धनतेरस) या 7 नवम्बर (नरक-चतुर्दशी) सायं।
पुराण: यम स्वयं घर-घर आते हैं इस-रात्रि। दीप-अर्पण से प्रसन्न।
✦ यम-दीप-विधि
सामग्री: मिट्टी का चौमुखा-दीप, सरसों का तेल, बत्ती, फूल, अक्षत।
समय: सूर्यास्त बाद।
स्थान: मुख्य-द्वार के बाहर, दक्षिण-दिशा-मुख।
मन्त्र: "मृत्युना दण्ड-पाशाभ्यां, कालेन च मम सह। त्रयोदश्यां दीपदानात्, सूर्यजः प्रीयतां मम॥"
अर्पण: यम के नाम से दीप जलायें। पूरी-रात बुझायें न।
परिवार-संख्या-अनुसार दीप: 1-2-4-13।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
धनतेरस या नरक-चतुर्दशी पर?▼
दोनों स्वीकार्य। पारम्परिक: धनतेरस-सायं। शास्त्र-कुछ-नरक-चतुर्दशी कहते। अधिकांश: धनतेरस।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।