विंचुदो

विंचुदो

मराठी पंचांग का "वृश्चिक काल" — यात्रा-वर्जित संधि

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विंचुदो क्या है?

विंचुदो (Vinchudo) मराठी पंचांग की एक विशिष्ट अवधारणा है। मराठी "विंचू" का अर्थ — "बिच्छू" (Scorpio)। यह उस "सन्धि-काल" को दर्शाता है जब चन्द्रमा कुछ विशेष नक्षत्रों के संगम-बिन्दु पर होता है — जिनकी ऊर्जा वृश्चिक राशि के डंक के समान तीक्ष्ण मानी गयी है।

विंचुदो का सबसे प्रसिद्ध रूप — जब चन्द्रमा "ज्येष्ठा" नक्षत्र के अन्तिम चरण से "मूल" नक्षत्र के प्रथम चरण तक के सन्धि (लगभग ५ घटी ≈ २ घंटे) में हो। इसी काल को कुछ ग्रन्थों में "अभुक्तमूल" अथवा "गण्डान्त" भी कहा जाता है।

महाराष्ट्र में पारम्परिक पंचांग देखकर विंचुदो काल में यात्रा, गृह प्रवेश, विवाह-वार्ता, नये कार्य का आरम्भ — सब त्यागे जाते हैं। मन्त्र-जप, ध्यान, पितृ-तर्पण इस काल में किया जा सकता है।

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अवधारणा एवं नियम

खगोलीय आधार: चन्द्र-कक्षा में नक्षत्र-संधि का काल। विंचुदो = ज्येष्ठा-मूल सन्धि (वृश्चिक-धनु राशि-संधि भी)। एक मास में लगभग १ बार आता है, ~२ घंटे का। पहचान: चन्द्रमा का सायन देशान्तर लगभग २४०° के निकट होता है (वृश्चिक का अन्त)। तीन प्रसिद्ध सन्धि-काल: रेवती-अश्विनी (मीन-मेष), आश्लेषा-मघा (कर्क-सिंह), ज्येष्ठा-मूल (वृश्चिक-धनु) — मराठी में मुख्य रूप से तीसरा "विंचुदो" कहलाता है। उच्चारण: विं-चु-दो (अथवा "विंचू"-काल)।

करने योग्य कार्य

🕉️
मन्त्र-जप एवं ध्यान
🙏
पितृ-तर्पण
🌾
दान — गरीबों को अन्न / वस्त्र
📚
पूजा-साहित्य का अध्ययन

वर्जित कार्य

🧭
यात्रा — विशेषतः लम्बी दूरी
💍
विवाह, सगाई, सम्बन्ध-निर्णय
🏡
गृह प्रवेश एवं भूमि पूजन
💼
नये व्यापार का आरम्भ
🏘️
सम्पत्ति क्रय अथवा महत्वपूर्ण निर्णय
⚔️
अस्त्र-शस्त्र क्रय एवं युद्ध-योग्य कार्य