✦ विंचुदो ✦
✦ मराठी पंचांग का "वृश्चिक काल" — यात्रा-वर्जित संधि ✦
✦ विंचुदो क्या है? ✦
विंचुदो (Vinchudo) मराठी पंचांग की एक विशिष्ट अवधारणा है। मराठी "विंचू" का अर्थ — "बिच्छू" (Scorpio)। यह उस "सन्धि-काल" को दर्शाता है जब चन्द्रमा कुछ विशेष नक्षत्रों के संगम-बिन्दु पर होता है — जिनकी ऊर्जा वृश्चिक राशि के डंक के समान तीक्ष्ण मानी गयी है।
विंचुदो का सबसे प्रसिद्ध रूप — जब चन्द्रमा "ज्येष्ठा" नक्षत्र के अन्तिम चरण से "मूल" नक्षत्र के प्रथम चरण तक के सन्धि (लगभग ५ घटी ≈ २ घंटे) में हो। इसी काल को कुछ ग्रन्थों में "अभुक्तमूल" अथवा "गण्डान्त" भी कहा जाता है।
महाराष्ट्र में पारम्परिक पंचांग देखकर विंचुदो काल में यात्रा, गृह प्रवेश, विवाह-वार्ता, नये कार्य का आरम्भ — सब त्यागे जाते हैं। मन्त्र-जप, ध्यान, पितृ-तर्पण इस काल में किया जा सकता है।
✦ अवधारणा एवं नियम ✦
खगोलीय आधार: चन्द्र-कक्षा में नक्षत्र-संधि का काल। विंचुदो = ज्येष्ठा-मूल सन्धि (वृश्चिक-धनु राशि-संधि भी)। एक मास में लगभग १ बार आता है, ~२ घंटे का। पहचान: चन्द्रमा का सायन देशान्तर लगभग २४०° के निकट होता है (वृश्चिक का अन्त)। तीन प्रसिद्ध सन्धि-काल: रेवती-अश्विनी (मीन-मेष), आश्लेषा-मघा (कर्क-सिंह), ज्येष्ठा-मूल (वृश्चिक-धनु) — मराठी में मुख्य रूप से तीसरा "विंचुदो" कहलाता है। उच्चारण: विं-चु-दो (अथवा "विंचू"-काल)।