भद्रा विचार

भद्रा विचार

विष्टि करण — शुभ कार्यों में वर्जित काल

भद्रा विचार क्या है?

भद्रा वैदिक पंचांग के ११ करणों में से ७वाँ "विष्टि" करण है — जिसे लोक में "भद्रा" अथवा "भद्रा-काल" कहते हैं। पुराण-कथा के अनुसार भद्रा भगवान् सूर्य की पुत्री और शनि की बहन हैं, जिन्हें ब्रह्मा जी ने यह वरदान दिया कि उनके काल में किया गया कोई शुभ कार्य फलित नहीं होगा।

भद्रा प्रत्येक चन्द्र मास में लगभग ८ बार आती है — दो तिथियों के बीच लगभग ६-७ घंटे के लिए। मुहूर्त ग्रन्थों में स्पष्ट है — विष्टि करण में विवाह, गृह प्रवेश, यात्रा, मुण्डन, सोना-क्रय, व्यापार आरम्भ — सब त्याज्य।

भद्रा का स्थान भी महत्त्वपूर्ण है — पाताल भद्रा (Patala) सर्वथा वर्जित नहीं है, मृत्युलोक भद्रा (Bhuloka) सर्वाधिक त्याज्य, और स्वर्ग भद्रा (Swarga) में पितृ-कार्य शुभ। यह स्थान तिथि एवं पक्ष पर निर्भर करता है।

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अवधारणा एवं नियम

भद्रा तब बनती है जब चन्द्र-सूर्य का अन्तर ६° बढ़ने पर ५२वाँ करण-स्थान आता है — कुल ६० करण-स्थानों में विष्टि के स्थान हैं ७, १४, २१, २८, ३५, ४२, ४९, ५६ (अर्थात् मासिक ८ बार)। प्रत्येक भद्रा-काल लगभग ६-७ घंटे का होता है। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, अष्टमी, एकादशी, पूर्णिमा एवं कृष्ण पक्ष की तृतीया, सप्तमी, दशमी, चतुर्दशी के पूर्वार्द्ध अथवा उत्तरार्द्ध में भद्रा की उपस्थिति होती है। निवारण: भद्रा-मुख (पहले ५ घटी) सबसे वर्जित — भद्रा-पुच्छ (अन्तिम ३ घटी) में कुछ कार्य अनुमत हैं।

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आगामी भद्रा काल

12 मई 2026 · 5:32 पूर्व – 2:56 अप.

15 मई 2026 · 8:34 पूर्व – 2:34 अप.

20 मई 2026 · 5:27 पूर्व – 11:10 पूर्व

23 मई 2026 · 5:26 पूर्व – 4:43 अप.

26 मई 2026 – 27 मई 2026

30 मई 2026 · 12:01 अप. – 6:01 अप.

3 जून 2026 · 8:15 पूर्व – 2:15 अप.

7 जून 2026 · 5:22 पूर्व – 3:11 अप.

10 जून 2026 · 1:55 अप. – 7:55 अप.

18 जून 2026 · 8:17 पूर्व – 2:17 अप.

21 जून 2026 · 3:23 अप. – 9:23 अप.

25 जून 2026 · 7:11 पूर्व – 1:11 अप.

* दिल्ली पंचांग सन्दर्भ। स्थान बदलने पर तिथियाँ ±1 दिन भिन्न हो सकती हैं।

करने योग्य कार्य

🙏
पितृ-तर्पण एवं श्राद्ध
🪔
मन्त्र-जप एवं पूजा
🍚
आहार-निद्रा जैसे सामान्य कार्य
🧭
भद्रा-पुच्छ में अति-आवश्यक यात्रा

वर्जित कार्य

💍
विवाह एवं सगाई
🏡
गृह प्रवेश एवं भूमि पूजन
💼
व्यापार आरम्भ
👶
मुण्डन एवं अन्य संस्कार
💎
सोना, चाँदी, वाहन क्रय
🪢
राखी बाँधना (रक्षाबन्धन में भद्रा-त्याग)