पंचक

पंचक

पाँच अशुभ दिनों का संयोग

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पंचक क्या है?

पंचक संस्कृत के "पंच + क" से बना — अर्थात् "पाँच" का समूह। जब चन्द्रमा क्रमशः धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद, एवं रेवती — इन पाँच नक्षत्रों से होकर गुज़रता है, उस लगभग ५ दिवसीय काल को "पंचक" कहते हैं।

मुहूर्त चिन्तामणि एवं नारद-पुराण में पंचक को कुछ विशेष कार्यों के लिए वर्जित बताया गया है — विशेषतः यात्रा-दिशा (दक्षिण), लकड़ी-संग्रह (काठ-कबाड़), छत-पट्टी, अग्नि-संस्कार। पंचक मासिक एक बार आता है, अर्थात् वर्ष में लगभग १२ बार।

पंचक का प्रकार उस वार पर निर्भर करता है जिस दिन वह आरम्भ होता है — रविवार से रोग पंचक, सोमवार से राज पंचक, मंगलवार से अग्नि पंचक, शुक्रवार से चोर पंचक, शनिवार से मृत्यु पंचक। बुध-गुरु से प्रारम्भ पंचक "सामान्य" माने जाते हैं।

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अवधारणा एवं नियम

पंचक तब आरम्भ होता है जब चन्द्रमा धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करता है, और तब समाप्त होता है जब वह रेवती से बाहर निकल कर अश्विनी में प्रवेश करता है। चन्द्रमा प्रत्येक नक्षत्र में लगभग २४ घंटे रहता है, इसलिए पंचक की कुल अवधि लगभग ५ दिन होती है। प्रत्येक पंचक का प्रारम्भ-वार उसका प्रकार निर्धारित करता है। राज पंचक एवं सामान्य पंचक में अधिकांश शुभ कार्य किये जा सकते हैं — सबसे अशुभ है मृत्यु पंचक एवं अग्नि पंचक।

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आगामी पंचक काल

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10 मई 2026 – 14 मई 2026

रोग पंचक

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7 जून 2026 – 11 जून 2026

रोग पंचक

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4 जुलाई 2026 – 8 जुलाई 2026

मृत्यु पंचक

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31 जुलाई 2026 – 4 अगस्त 2026

चोर पंचक

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27 अगस्त 2026 – 31 अगस्त 2026

सामान्य पंचक

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24 सितम्बर 2026 – 28 सितम्बर 2026

सामान्य पंचक

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21 अक्टूबर 2026 – 25 अक्टूबर 2026

सामान्य पंचक

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17 नवम्बर 2026 – 21 नवम्बर 2026

अग्नि पंचक

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15 दिसम्बर 2026 – 19 दिसम्बर 2026

अग्नि पंचक

* दिल्ली पंचांग सन्दर्भ। स्थान बदलने पर तिथियाँ ±1 दिन भिन्न हो सकती हैं।

करने योग्य कार्य

🪔
पूजा एवं भजन-कीर्तन
🙏
दान एवं तीर्थ यात्रा (दक्षिण को छोड़)
💍
विवाह — राज एवं सामान्य पंचक में
📚
मन्त्र दीक्षा एवं अध्ययन

वर्जित कार्य

🧭
दक्षिण दिशा की यात्रा
🪵
लकड़ी-संग्रह एवं काठ-कबाड़ क्रय
🏠
छत-पट्टी एवं नई छत डालना
🔥
अग्नि-संस्कार (दाह कर्म) — मृत्यु पंचक में अति-वर्जित
🛏️
खाट-पलंग बनाना
🏡
गृह-प्रवेश — अग्नि एवं मृत्यु पंचक में नहीं