✦ पंचक ✦
✦ पाँच अशुभ दिनों का संयोग ✦
✦ पंचक क्या है? ✦
पंचक संस्कृत के "पंच + क" से बना — अर्थात् "पाँच" का समूह। जब चन्द्रमा क्रमशः धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद, एवं रेवती — इन पाँच नक्षत्रों से होकर गुज़रता है, उस लगभग ५ दिवसीय काल को "पंचक" कहते हैं।
मुहूर्त चिन्तामणि एवं नारद-पुराण में पंचक को कुछ विशेष कार्यों के लिए वर्जित बताया गया है — विशेषतः यात्रा-दिशा (दक्षिण), लकड़ी-संग्रह (काठ-कबाड़), छत-पट्टी, अग्नि-संस्कार। पंचक मासिक एक बार आता है, अर्थात् वर्ष में लगभग १२ बार।
पंचक का प्रकार उस वार पर निर्भर करता है जिस दिन वह आरम्भ होता है — रविवार से रोग पंचक, सोमवार से राज पंचक, मंगलवार से अग्नि पंचक, शुक्रवार से चोर पंचक, शनिवार से मृत्यु पंचक। बुध-गुरु से प्रारम्भ पंचक "सामान्य" माने जाते हैं।
✦ अवधारणा एवं नियम ✦
पंचक तब आरम्भ होता है जब चन्द्रमा धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करता है, और तब समाप्त होता है जब वह रेवती से बाहर निकल कर अश्विनी में प्रवेश करता है। चन्द्रमा प्रत्येक नक्षत्र में लगभग २४ घंटे रहता है, इसलिए पंचक की कुल अवधि लगभग ५ दिन होती है। प्रत्येक पंचक का प्रारम्भ-वार उसका प्रकार निर्धारित करता है। राज पंचक एवं सामान्य पंचक में अधिकांश शुभ कार्य किये जा सकते हैं — सबसे अशुभ है मृत्यु पंचक एवं अग्नि पंचक।
✦ आगामी पंचक काल ✦
10 मई 2026 – 14 मई 2026
रोग पंचक
7 जून 2026 – 11 जून 2026
रोग पंचक
4 जुलाई 2026 – 8 जुलाई 2026
मृत्यु पंचक
31 जुलाई 2026 – 4 अगस्त 2026
चोर पंचक
27 अगस्त 2026 – 31 अगस्त 2026
सामान्य पंचक
24 सितम्बर 2026 – 28 सितम्बर 2026
सामान्य पंचक
21 अक्टूबर 2026 – 25 अक्टूबर 2026
सामान्य पंचक
17 नवम्बर 2026 – 21 नवम्बर 2026
अग्नि पंचक
15 दिसम्बर 2026 – 19 दिसम्बर 2026
अग्नि पंचक
* दिल्ली पंचांग सन्दर्भ। स्थान बदलने पर तिथियाँ ±1 दिन भिन्न हो सकती हैं।