✦ गंड मूल ✦
✦ राशि सन्धि के ६ नक्षत्र — विशेष शान्ति आवश्यक ✦
✦ गंड मूल क्या है? ✦
गंड मूल ज्योतिष की एक विशेष अवधारणा है। ६ नक्षत्र राशि-संधि (gandanta) पर पड़ते हैं — अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल, एवं रेवती। इन नक्षत्रों में चन्द्रमा का प्रवेश "गंड मूल काल" कहलाता है।
विशेष महत्व इसका यह है — यदि किसी शिशु का जन्म इन ६ नक्षत्रों में होता है, तो उसे "मूल नक्षत्र दोष" लगता है, जिसके लिए जन्म के २७ दिन बाद "मूल शान्ति पूजा" करनी चाहिए। मान्यता है — बिना शान्ति किये यह दोष शिशु एवं परिवार को कष्ट दे सकता है।
गंड मूल का दूसरा अर्थ — सन्धि-काल में किया गया कोई शुभ कार्य पूर्ण फलदायी नहीं होता। चन्द्रमा प्रत्येक नक्षत्र में लगभग २४ घंटे रहता है, अतः प्रत्येक गंड मूल काल लगभग १ दिन का होता है। मास में यह ६ बार आता है।
✦ अवधारणा एवं नियम ✦
गंड मूल = ६ नक्षत्र: अश्विनी (राशि सन्धि मेष आरम्भ), आश्लेषा (कर्क-सिंह सन्धि), मघा (सिंह आरम्भ), ज्येष्ठा (वृश्चिक-धनु सन्धि), मूल (धनु आरम्भ), रेवती (मीन-मेष सन्धि)। इन नक्षत्रों में जन्मे शिशु के लिए "मूल शान्ति पूजा" विधान — २७ दिन बाद उसी नक्षत्र की पुनरावृत्ति पर। आश्लेषा-मघा-सन्धि एवं ज्येष्ठा-मूल-सन्धि सबसे तीव्र मानी जाती हैं — विशेष रूप से अन्तिम ४८ मिनट (२ घटी) पूर्व नक्षत्र की एवं प्रथम ४८ मिनट उत्तर नक्षत्र की।
✦ आगामी गंड मूल काल ✦
14 मई 2026 – 15 मई 2026
रेवती
22 मई 2026 – 23 मई 2026
आश्लेषा
1 जून 2026 – 2 जून 2026
ज्येष्ठा
11 जून 2026 – 12 जून 2026
रेवती
19 जून 2026 – 20 जून 2026
आश्लेषा
28 जून 2026 – 29 जून 2026
ज्येष्ठा
8 जुलाई 2026 – 9 जुलाई 2026
रेवती
16 जुलाई 2026 – 17 जुलाई 2026
आश्लेषा
25 जुलाई 2026 – 27 जुलाई 2026
ज्येष्ठा
4 अगस्त 2026 – 5 अगस्त 2026
रेवती
13 अगस्त 2026 · गुरु
आश्लेषा
22 अगस्त 2026 – 23 अगस्त 2026
ज्येष्ठा
* दिल्ली पंचांग सन्दर्भ। स्थान बदलने पर तिथियाँ ±1 दिन भिन्न हो सकती हैं।