त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिङ्ग

नासिक के पास 10वाँ ज्योतिर्लिङ्ग — गोदावरी-उद्गम

क्रम

10/12

विशेष

त्रिपिण्डी

नासिक से

28 किमी

त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिङ्ग — महाराष्ट्र के नासिक से 28 किमी। 12-ज्योतिर्लिङ्ग में 10वाँ। गोदावरी-नदी का उद्गम। ब्रह्मगिरि-पर्वत पर।

अद्वितीय: 3 छोटे-लिङ्ग (ब्रह्मा, विष्णु, शिव)। प्रातः सोने का मुकुट-दर्शन। त्रिपिण्डी-श्राद्ध और कालसर्प-दोष-निवारण का मुख्य-स्थल।

विशेषताएँ

गोदावरी-नदी का उद्गम-स्थल।

कुम्भ-मेला-स्थल (12 वर्षों में)।

ब्रह्मगिरि-पर्वत-परिक्रमा (40 किमी, 2 दिन)।

कुशावर्त-तीर्थ: पवित्र-कुण्ड।

सिंहस्थ-कुम्भ अगला 2027।

विशेष-अनुष्ठान

**त्रिपिण्डी-श्राद्ध**: 3-पीढ़ी पितृ-शान्ति। ₹5000-15000।

**कालसर्प-शान्ति**: ₹2500-7000।

**नारायण-नागबलि**: 3-दिन। ₹15000-30000।

**रुद्राभिषेक**: ₹1000-3000।

सब बुकिंग पुजारी-माध्यम।

दर्शन

सुबह 5:30 — रात्रि 9:00।

मंगल-आरती: 5:30 AM (सोने का मुकुट)।

सर्व-दर्शन: निःशुल्क।

VIP-दर्शन: ₹200।

सोमवार-शिवरात्रि भीड़।

श्रावण-सोमवार: अति-भीड़।

पहुँच

नासिक से 28 किमी।

मुम्बई से 200 किमी (4 घण्टे)।

पुणे से 280 किमी।

नासिक रेलवे + टैक्सी।

हवाई: मुम्बई।

होटल नासिक में।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपिण्डी-श्राद्ध क्यों यहीं?

त्र्यम्बकेश्वर भारत के 3 प्रमुख-त्रिपिण्डी-स्थलों में सर्वोच्च (अन्य: गया, पुष्कर)। 7-पीढ़ियों के पितरों की मुक्ति।

कुम्भ कब?

सिंहस्थ-कुम्भ 12 वर्षों में। 2015 हुआ। अगला 2027।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।