त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिङ्ग — महाराष्ट्र के नासिक से 28 किमी। 12-ज्योतिर्लिङ्ग में 10वाँ। गोदावरी-नदी का उद्गम। ब्रह्मगिरि-पर्वत पर।
अद्वितीय: 3 छोटे-लिङ्ग (ब्रह्मा, विष्णु, शिव)। प्रातः सोने का मुकुट-दर्शन। त्रिपिण्डी-श्राद्ध और कालसर्प-दोष-निवारण का मुख्य-स्थल।
✦ विशेषताएँ
गोदावरी-नदी का उद्गम-स्थल।
कुम्भ-मेला-स्थल (12 वर्षों में)।
ब्रह्मगिरि-पर्वत-परिक्रमा (40 किमी, 2 दिन)।
कुशावर्त-तीर्थ: पवित्र-कुण्ड।
सिंहस्थ-कुम्भ अगला 2027।
✦ विशेष-अनुष्ठान
**त्रिपिण्डी-श्राद्ध**: 3-पीढ़ी पितृ-शान्ति। ₹5000-15000।
**कालसर्प-शान्ति**: ₹2500-7000।
**नारायण-नागबलि**: 3-दिन। ₹15000-30000।
**रुद्राभिषेक**: ₹1000-3000।
सब बुकिंग पुजारी-माध्यम।
✦ दर्शन
सुबह 5:30 — रात्रि 9:00।
मंगल-आरती: 5:30 AM (सोने का मुकुट)।
सर्व-दर्शन: निःशुल्क।
VIP-दर्शन: ₹200।
सोमवार-शिवरात्रि भीड़।
श्रावण-सोमवार: अति-भीड़।
✦ पहुँच
नासिक से 28 किमी।
मुम्बई से 200 किमी (4 घण्टे)।
पुणे से 280 किमी।
नासिक रेलवे + टैक्सी।
हवाई: मुम्बई।
होटल नासिक में।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
त्रिपिण्डी-श्राद्ध क्यों यहीं?▼
त्र्यम्बकेश्वर भारत के 3 प्रमुख-त्रिपिण्डी-स्थलों में सर्वोच्च (अन्य: गया, पुष्कर)। 7-पीढ़ियों के पितरों की मुक्ति।
कुम्भ कब?▼
सिंहस्थ-कुम्भ 12 वर्षों में। 2015 हुआ। अगला 2027।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।